न्याय की आस में ठिठुरता बचपन और बुढ़ापा, शिमला सचिवालय के बाहर दिव्यांगों का चक्का जाम

शिमला में मांगों को लेकर दिव्यांगों ने सचिवालय के बाहर चक्का जाम किया। कालीबाड़ी मंदिर में 804 दिनों से धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी बैकलॉग पदों को भरने और पेंशन 1,700 से बढ़ाकर 5,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड में संघर्ष जारी है।
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत दिव्यांगों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। सचिवालय के बाहर पिछले 70 दिनों से धरने पर बैठे दिव्यांगों ने सोमवार सुबह 10 बजे कार्ट रोड पर 'चक्का जाम' कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण शहर की मुख्य लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई।    दृष्टिहीन जनसंगठन के जिला प्रभारी राजेश ठाकुर ने बताया कि दिव्यांगों का यह आंदोलन महज कुछ दिनों का नहीं है। कालीबाड़ी मंदिर के पास धरने पर बैठे हुए इन्हें आज 804 दिन पूरे हो चुके हैं।    शिमला दिव्यांग प्रदर्शन, सचिवालय चक्का जाम, दृष्टिबाधित संगठन हिमाचल, दिव्यांग पेंशन मांग, शिमला समाचार   Shimla Disability Protest, Secretariat Road Block, Himachal Specially Abled Demands, HP Govt Backlog Recruitment, Shimla Traffic Jam News.

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत दिव्यांगों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। सचिवालय के बाहर पिछले 70 दिनों से धरने पर बैठे दिव्यांगों ने सोमवार सुबह 10 बजे कार्ट रोड पर 'चक्का जाम' कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण शहर की मुख्य लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई।

दृष्टिहीन जनसंगठन के जिला प्रभारी राजेश ठाकुर ने बताया कि दिव्यांगों का यह आंदोलन महज कुछ दिनों का नहीं है। कालीबाड़ी मंदिर के पास धरने पर बैठे हुए इन्हें आज 804 दिन पूरे हो चुके हैं। पिछले दो सालों से अधिक समय से ये लोग कड़कती धूप, मूसलाधार बारिश और अब शून्य से नीचे गिरते तापमान में भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। सचिवालय के बाहर भी 70 दिनों से पांच दिव्यांग रोज़ाना क्रमिक अनशन पर बैठ रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण अब वे उग्र आंदोलन को मजबूर हैं।

प्रमुख मांगें: क्यों आक्रोशित हैं दिव्यांगजन?

प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि सरकार दिव्यांगों के प्रति केवल सहानुभूति दिखाती है, लेकिन उनके अधिकारों को लागू करने में विफल रही है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • बैकलॉग पदों पर भर्ती: 1995 से लंबित चतुर्थ श्रेणी (Class-IV) के बैकलॉग पदों को तुरंत भरा जाए। शिक्षा, वन, लोक निर्माण और जलशक्ति जैसे बड़े विभागों में दिव्यांगों के लिए आरक्षित पदों पर नियुक्तियां रुकी हुई हैं।

  • पेंशन में सम्मानजनक वृद्धि: वर्तमान में दिव्यांगों को दी जा रही 1,700 रुपये की मासिक पेंशन को बढ़ाकर 5,000 रुपये करने की मांग की जा रही है, ताकि वे इस महंगाई में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

  • बिना शर्त सरकारी योजनाएं: दिव्यांगजनों को बीपीएल (BPL) श्रेणी में बिना किसी शर्त के शामिल किया जाए। साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ भी उन्हें बिना किसी कठिन प्रक्रिया के दिया जाए।

  • कोटे का ईमानदारी से पालन: सरकारी नौकरियों में 1 प्रतिशत कोटे के तहत होने वाली भर्तियों में पारदर्शिता और तेजी लाई जाए।

सड़कों पर नारेबाजी और ठिठुरता शरीर

सोमवार सुबह जब दिव्यांगों ने कार्ट रोड पर चक्का जाम किया, तो पूरा वातावरण नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे भी समाज का हिस्सा हैं और केवल अपने हक की नौकरी और पेंशन मांग रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कई दिव्यांगजन ठंड के कारण कांपते हुए नजर आए, लेकिन उनका संकल्प कम नहीं हुआ।

राजेश ठाकुर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी जायज मांगों पर गौर नहीं किया और अधिसूचना जारी नहीं की, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और भी उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल, शिमला पुलिस और प्रशासन यातायात बहाल करने और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन दिव्यांगजन किसी ठोस लिखित आश्वासन के बिना हटने को तैयार नहीं हैं।

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