Social Media पर बढ़ रही अश्लीलता पर राष्ट्रपति कार्यालय गंभीर

विजय हीर (Vijay Heer) की याचिका को भेजा सूचना प्रसारण मंत्रालय,  राष्ट्रपति (President) कार्यालय ने इसकी गंभीरता देते हुए इस याचिका को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार पी.के. अब्दुल करीम को भेजा है ।
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हमीरपुर ।  सोशल मीडिया (Social Media) में आजकल रील्स और नाटकीय वीडियो (Video) बनाने में बढ़ रही अश्लीलता पर शिकंजा कसने की ज़रूरत है । इस बारे में एक विस्तृत शिकायत शिक्षक विजय हीर (Vijay Heer)  ने राष्ट्रपति (President) कार्यालय को भेजी थी और महामहिम को भारतीय सोशल मीडिया में फैल रही अश्लीलता पर शिकंजा कसने के लिए याचिका पत्र भेजा था । राष्ट्रपति  (President) कार्यालय ने इसकी गंभीरता देते हुए इस याचिका को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार पी.के. अब्दुल करीम को भेजा है । याचिका में इन्स्टाग्राम व फेसबुक की अश्लील या उत्तेजक रील्स, वीडियो , पारिवारिक रिश्तों में विकृति परोसने हेतु बनाए जा रहे अनैतिक वीडियो आदि को मशीनी सॉफ्टवेयर से ब्लॉक करने और अपलोड होने व प्रसारित होने से रोकने की अपील की गई है । 

विजय हीर  (Vijay Heer) ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, सूचना प्रसारण मंत्री व विभिन्न अन्य अधिकारियों को इस बारे में समय रहते कार्यवाही की अपील की है क्योंकि नाबालिग बच्चे वर्चुअल डेटिंग का शिकार हैं। कोरोनाकाल (Corona Period) में ऑनलाइन (Online) पढ़ाई की आड़ में ये सब और आम हो गया है। देश का हर वह चौथा बच्चा जो दस-बारह साल का है, उसका एकाउंट फेसबुक पर है। पढ़ने-लिखने और करियर बनाने की उम्र में ही बच्चे अश्लील सामग्री की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
बच्चों में अश्लील सामग्रियों का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। परिजनों को भी पता है कि उनका बच्चा बिगड़ रहा है, लेकिन चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। स्थिति बहुत गंभीर होती जा रही है। टेलीकॉम कंपनियों की हालिया रिपोर्ट बताती है कि मोबाइल डाटा का इस्तेमाल सबसे ज्यादा लोग अश्लील वीडियो के देखने में खर्च करते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि उक्त अश्लील सामग्री ग्राहकों पर जबरदस्ती थोपी जा रही है। अश्लीलता भी इस किस्म की होती है कि कई बार परिवार के साथ बैठे भी अपने आपको शर्मिंदा होना पड़ता है। लाइक, फालो व शेयर करने के बिना ही अश्लील सामग्री प्रस्तुत हो जाती है।
सोशल मीडिया (Social Media) पर परोसी जाने वाली अश्लीलता से किशोरों के मन पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। युवतियाँ भी अनेकों आपत्तिजनक रील्स , वीडियो आदि बनाने में आगे हैं । मोबाइल यूजरों की संख्या भारत में जिस गति से बढ़ रही है, अगले पांच सालों में चीन को भी पछाड़ देगी। ऐसे में भारतीय संस्कृति व मूल्यों की रक्षा हेतु ज़रूरी सेंसरशिप की जानी आपेक्षित है और अश्लीलता परोस रहे व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 292 के तहत दंडित करने की अपील हीर  (Heer) ने अपनी याचिका में की है ।

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