भाजपा-कांग्रेस के लिए आसान नहीं मंडी का ताज, सामने हैं ये चुनौतियां

टिकट के चाहवान दोनों दलों के लिए सिरदर्द बन सकते हैं। बगावत से यहां राजनीतिक समीकरण बनने के साथ ही और भी बिगड़ सकते हैं। कांग्रेस में तो बगावत के स्वर अभी से बुलंद हैं।
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भाजपा-कांग्रेस के लिए आसान नहीं मंडी का ताज

भाजपा और कांग्रेस के लिए मंडी संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में जीत का ताज हासिल करना आसान नहीं होगा। टिकट के चाहवान दोनों दलों के लिए सिरदर्द बन सकते हैं। बगावत से यहां राजनीतिक समीकरण बनने के साथ ही और भी बिगड़ सकते हैं। कांग्रेस में तो बगावत के स्वर अभी से बुलंद हैं। आने वाले दिनों में यह चिंगारी का रूप धारण कर सकते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम के बाद अब उनके पोते आश्रय शर्मा ने भी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर को टिकट को लेकर कई साल से चली आ रही परंपरा की याद दिलाई है। 

कल तक चुनाव मैदान से भाग रहे दादा-पोते की जोड़ी ने टिकट राग छेड़कर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। दोनों सीधे प्रदेशाध्यक्ष को घेरने पर उतर आए हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव की तरह उपचुनाव में भी दोनों की नौटंकी शुरू हो गई है। टिकट न मिलने की सूरत में दोनों फिर पाला बदल सकते हैं। खुद को फ्रंटफुट पर मानकर चल रहे कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष अब नया धर्म संकट खड़ा हो गया है। कांग्रेस के ज्यादातर नेता मंडी लोकसभा के लिए पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को सशक्त उम्मीदवार मान रहे हैं।


 

वहीं, भाजपा ने टिकट को लेकर अभी कोई फैसला नहीं किया है। भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर, शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर का नाम चर्चा में हैं। पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय राणा, ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर, प्रदेश सचिव पायल वैद्य, मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष निहाल चंद शर्मा, जिला परिषद सदस्य बिहारी लाल व मीडिया संयोजक पुरुषोत्तम शर्मा टिकट की दौड़ में शामिल हैं। भाजपा को इन सभी को मनाकर एक कतार में चलाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।

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