हिमाचल में ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना शुरु, प्रवासी ले सकेंगे सस्ता राशन
शिमला। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रवासी मजदूरों के लिए ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना के अंतर्गत खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग की अंतरराज्यीय पोर्टेबिलिटी योजना का शुभारंभ कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से उपभोक्ताओं को देश में कहीं भी उचित मूल्य की दुकानों से राशन लेने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसे राशन कार्ड की राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी योजना के अंतर्गत किया जाएगा। योजना से देश के लगभग 67 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। इनमें हिमाचल के लाखों लोग भी शामिल हैं।
जयराम ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश के लगभग आठ करोड़ प्रवासी मजदूरों को दो महीने के लिए मुफ्त अनाज देने का निर्णय लिया है। जिन मजदूरों के पास राशन कार्ड नहीं हैं, उन्हें भी हर महीने प्रति व्यक्ति निशुल्क पांच किलो आटा अथवा चावल और एक किलो दाल दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश को 2864.46 टन खाद्य सामग्री आवंटित की गई है, जिससे प्रदेश सरकार को लक्षित समूहों तक राशन प्रदान पहुंचाने में सुविधा होगी। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुंडू, सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति अमिताभ अवस्थी और निदेशक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति आबिद हुसैन सादिक भी उपस्थित थे।
मोदी सरकार की महत्वकांक्षी योजना है वन नेशन वन राशन कार्ड
वन नेशन वन राशन कार्ड मोदी सरकार की काफी अहम और महत्वकांक्षी योजना है। इसका फायदा उन गरीब मजदूरों को सबसे अधिक मिलेगा जो एक राज्य से दूसरे राज्य में करने के लिए जाते हैं। केंद्र सरकार इस योजना को लागू करने में काफी तेजी दिखा रही है। पहले ही इस योजना को आने वाली 1 जून से देश भर में लागू करने का ऐलान किया जा चुका है। इतना ही नहीं देश के 12 राज्यों में ये योजना 1 जनवरी से लागू भी हो चुकी है। मगर इस योजना की जरूरत पर ध्यान देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह प्रवासी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को सब्सिडी वाला अनाज मुहैया करने के लिए चल रहे कोरोना वायरस लॉकडाउन अवधि के दौरान ‘वन राष्ट्र, वन राशन कार्ड’ योजना को लागू करने पर विचार करे। लॉकडाउन में कई लोगों के सामने अनाज की किल्लत है। ऐसे में ये योजना इन लोगों के लिए काफी लाभदायक साबित होगी।
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