Sanitizer scam की जांच फाइल सरकार के हवाले

शिमला। सैनिटाइजर घोटाले (Sanitizer scam) में उच्च स्तरीय विभागीय जांच की फाइल राज्य सरकार को भेजी दी गई है। आरंभिक जांच में गड़बड़ की पुष्टि होने के बाद इस मामले में आला अधिकारी को जांच अधिकारी लगाने की सिफारिश की है। इस अनुशंसा के साथ सामान्य प्रशासन विभाग ने मंजूरी के लिए Sanitizer scam की
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Sanitizer scam की जांच फाइल सरकार के हवाले

शिमला। सैनिटाइजर घोटाले (Sanitizer scam) में उच्च स्तरीय विभागीय जांच की फाइल राज्य सरकार को भेजी दी गई है। आरंभिक जांच में गड़बड़ की पुष्टि होने के बाद इस मामले में आला अधिकारी को जांच अधिकारी लगाने की सिफारिश की है। इस अनुशंसा के साथ सामान्य प्रशासन विभाग ने मंजूरी के लिए Sanitizer scam  की फाइल मुख्य सचिव को भेजी है। Sanitizer scam में इनक्वायरी तथा प्रिजाइडिंग अफसर लगाने की सिफारिश की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि जाहिर है कि सैनिटाइजर घोटाले में घपलेबाज सप्लायर के खिलाफ स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो ने केस दर्ज कर लिया है। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग ने भी खरीद में शामिल ब्रांच के अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका पड़ताल के लिए जांच करवाई है। इस आधार पर ब्रांच के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को हटा दिया गया है। इसके अलावा चार्जशीट और सस्पेंशन की सजा दी गई है। इस कार्रवाई के तुरंत बाद अब सामान्य प्रशासन विभाग ने आरोपी अफसरों पर शिकंजा कसने के लिए उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की है।

उल्लेखनीय है कि सचिवालय प्रशासन विभाग में सामान खरीदने के निर्णय विभाग में गठित परचेज कमेटी लेती है। इसकी अध्यक्षता उप सचिव स्तर का अधिकारी करता है। सैनिटाइजर खरीदने का निर्णय भी इसी कमेटी ने लिया। सूचना के अनुसार सप्लाई ऑर्डर हासिल करने वाले सप्लायर के पास ड्रग व कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 के अंतर्गत लाइसेंस भी नहीं था। नियमों के तहत इस लाइसेंस के आधार पर ही सप्लाई ऑर्डर लिया जा सकता है। इस बारे में निदेशक हैल्थ सेफ्टी एंड रेगुलेशन ने अपने पत्र संख्या दिनांक आठ मई, 2020 द्वारा सचिवालय प्रशासन को सूचित भी किया है। 50 का सेनेटाइजर 150 में सप्लायर ने फर्जीवाड़े से 50 रुपए का सेनेटाइजर 150 रुपए में बेचने का ताना-बाना बुन लिया। हालांकि 100 मिलीलीटर के सेनेटाइजर पर 50 रुपए एमआरपी चस्पां था।

गरीबों में बंटने वाला मुफ्त का सामान सचिवालय को बेचा

कोरोना संकट में बुने गए हेराफेरी के इस जाल में रोंगटे खड़े करने वाला खुलासा यह है कि सप्लायर ने एक फर्म से हजारों की संख्या में सैनिटाइजर की सप्लाई मुफ्त ली थी। यानी गरीबों को बांटने के लिए मुफ्त में लिए सेनेटाइजर सचिवालय को बेचे गए। हालांकि सचिवालय प्रशासन की सतर्कता के चलते सप्लायर को एक भी रुपए का भुगतान नहीं किया गया। सूचना के अनुसार सप्लायर ने सचिवालय प्रशासन को पेमेंट अदायगी के लिए लीगल नोटिस भेजा है।

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