क्या होता है इथेनॉल: जिसका हिमाचल में स्थापित हो रहा है प्लांट, किसको होगा फायदा

इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इथेनॉल में 35 फीसदी ऑक्सीजन होता है।
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Fuel Ethanol Plant

डेस्क। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार गन्ने के बाद चावल से इथेनॉल बनाने पर फोकस बढ़ाया है। दिसंबर 2020 में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी गई थी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि इथेनॉल का उत्पादन कर किसान अपनी तकदीर बदल सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल को गन्ने के बाद अब चावल से बनाया जाएगा तो इससे किसानों को सीधा फायदा होगा। ऐसे में किसान को उसकी उपज का वाजिब दाम मिलेगा। भारतीय परिपेक्ष्य में देखा जाए तो इथेनॉल ऊर्जा का अक्षय स्रोत है क्योंकि भारत में गन्ने की फसल की कमी कभी नहीं हो सकती।


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जानिए क्या है इथेनॉल (Ethanol)-इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। एथेनॉल का उत्पादन यूं तो मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होती है, लेकिन शर्करा वाली कई अन्य फसलों से भी इसे तैयार किया जा सकता है। एथेनॉल के इस्तेमाल से 35 फीसदी कम कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। इतना ही नहीं यह कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन और सल्फर डाइऑक्साइड को भी कम करता है। इसके अलावा एथेनॉल हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन को भी कम करता है। इथेनॉल में 35 फीसदी ऑक्सीजन होता है। इथेनॉल फ्यूल को इस्तेमाल करने से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है।


पेट्रोल मंत्रालय अगले पांच साल के लिए इथेनॉल की खरीद करने की गारंटी देने को तैयार है। इथेनॉल का उत्पादन बढ़ने का फायदा यह होगा कि पेट्रोलियम पदार्थों के आयात का बोझ कम होगा। घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए प्रतिवर्ष लगभग आठ लाख करोड़ रुपये का डीजल-पेट्रोल आयात करते हैं। डीजल-पेट्रोल में 22 फीसदी तक इथेनॉल मिलाने की मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इथेनॉल का उत्पादन कर किसान अपना भविष्य संवार सकते हैं। 
 

सरकार ने 2022 तक पेट्रोल के साथ 10 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का और 2030 तक 20 प्रतिशत सम्मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार के इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग नियमित रूप से वित्तीय सेवा विभाग, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राज्य सरकारें। चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों और बैंकों के साथ मिलकर बैठकें कर रहे है।


हमें क्यों है इथेनॉल फ्यूल की जरूरत
इथेनॉल इको-फ्रैंडली फ्यूल है और पर्यावरण को जीवाश्म ईंधन से होने वाले खतरों से सुरक्षित रखता है। इस फ्यूल को गन्ने से तैयार किया जाता है। कम लागत पर अधिक ऑक्टेन नंबर देता है और MTBE जैसे खतरनाक फ्यूल के लिए ऑप्शन के रूप में काम करता है। यह इंजन की गर्मी को भी बाहर निकलता है। एल्कोहल बेस्ड फ्यूल गैसोलीन के साथ मिलकर ई 85 तक तैयार हो गया। कहने का मतलब इथेनॉल फ्यूल हमारे पर्यावरण और गाड़ियों के लिए सुरक्षित है।


ब्राजील में क्यों होता है सबसे ज्यादा इस्तेमाल
ब्राजील में लगभग 40 प्रतिशत गाड़ियां 100 फीसदी इथेनॉल से चलती हैं, यही नहीं बाकी गाड़ियां भी 24 फीसदी इथेनॉल मिला ईंधन उपयोग कर रही हैं। ब्राजील जैसे देश के लिए यह करना आसान इसलिए हुआ क्योंकि उनके पास भारत से तीन गुना जमीन और आबादी उत्तर प्रदेश जितनी है। स्वीडन और कनाडा में भी इथेनॉल पर गाड़ियां चल रही है। कनाडा में तो इथेनॉल के इस्तेमाल पर सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जा रही है। 

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