मटौर-शिमला फोरलेनः 1400 विस्थापितों को पहले चरण में मिला 60 करोड़ मुआवजा

यह मुआवजा राशि सिर्फ फोरलेन की जद में आने वाली जमीन के एवज में मिली है। जिन परिवारों के घर अथवा अन्य भवन जद में आ रहे थे, उन्हें अभी मुआवजा राशि नहीं मिली है।

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मटौर-शिमला फोरलेन निर्माण से विस्थापित होने वाले परिवारों को मुआवजा राशि का आवंटन शुरू हो गया है। पहले चरण में कांगड़ा उपमंडल के लगभग 1400 परिवारों के खाते में 60 करोड़ रुपये मुआवजा राशि जमा हो गई है। हालांकि यह मुआवजा राशि सिर्फ फोरलेन की जद में आने वाली जमीन के एवज में मिली है। जिन परिवारों के घर अथवा अन्य भवन जद में आ रहे थे, उन्हें अभी मुआवजा राशि नहीं मिली है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने दो माह पहले 133 करोड़ की मुआवजा राशि कांगड़ा एसडीएम के खाते में जमा करा दी थी। विस्थापित होने वाले परिवारों में इस राशि का आवंटन किया जा रहा है। मटौर-शिमला फोरलेन निर्माण के पहले चरण में कांगड़ा बाईपास से भंगवार (रानीताल) के बीच निर्माण कार्य होगा। इससे विस्थापित होने वाले परिवारों को लगभग 220 करोड़ का मुआवजा दिया जाना है। 


एनएचएआई ने मुआवजे के पहले चरण के तहत लगभग 133 करोड़ की राशि जारी की थी और उसी राशि के तहत 60 करोड़ की राशि कांगड़ा एसडीएम की ओर से विस्थावितों के खाते में जमा करा दी है। मुआवजे की 85 करोड़ की राशि दूसरे चरण में आवंटित की जाएगी। फोरलेन के तहत कांगड़ा उपमंडल का लगभग 20 किलोमीटर का क्षेत्र आ रहा है। एसडीएम कांगड़ा को उपमंडल भू-अधिग्रहण संरक्षण अधिकारी का जिम्मा भी है।

एसडीएम कांगड़ा अभिषेक वर्मा ने बताया कि 60 करोड़ लगभग 1400 विस्थापित लोगों के खाते में जमा कर दिए हैं। कांगड़ा से रानीताल के बीच कुल 3302 परिवार हैं, जिनकी मटौर-शिमला फोरलेन में जमीन आ रही है। नेशनल हाईवे के 3जी फैक्टर-1 के तहत इनको मुआवजा दिया जा रहा है। अभी तक सिर्फ जिनकी जमीन आ रही है, उन्हीं को मुआवजा दिया जा रहा है। जिनके घर व अन्य भवन इस फोरलेन में आ रहे हैं, उन्हें बाद में मुआवजा दिया जाएगा।

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