लठियाणी-मंदली पुल का सपना साकार करने की दिशा में बढ़ा एक और कदम

लठियाणी-मंदली पुल के लिए दो प्रस्तावित अलाइनमैंट में से एक को अंतिम रुप से स्वीकार कर लिया गया हैं। लठियाणी-मंदली पुल के लिए इसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी।
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Virender Kanwar

ऊना। लठियाणी-मंदली पुल के निर्माण को लेकर जारी प्रक्रिया एक कदम और आगे बढ़ गई है। इस पुल के मेक-अलाइनमेंट को फाईनल कर दिया गया है। यह जानकारी ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कृषि, मत्स्य व पशुपालन मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने दी। उन्होंने बताया कि अलाइनमेंट को फाईनल कर दिया गया है। इस संबंध में सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय उच्च मार्ग मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल नोर्थ और हिमाचल प्रदेश नेशनल हाईवे के चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारियों के बीच बैठक में अलाइनमेंट को अंतिम रुप दिया गया। 

उन्होंने कहा कि लठियाणी-मंदली पुल के लिए दो प्रस्तावित अलाइनमैंट में से एक को अंतिम रुप से स्वीकार कर लिया गया है। लठियाणी-मंदली पुल के लिए इसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी। वीरेन्द्र कंवर ने कहा कि लठियाणी एवं अंदरौली क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने में यह पुल मील का पत्थर साबित होगा। पुल तक पहुंचने के लिए दोनों छोर पर लगभग छह किमी लंबा एप्रोच रोड भी तैयार किया जाएगा, जिसके लिए भूमि अधिग्रहित की जाएगी। 

ग्रामीण विकास मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कहा कि पुल, भूमि अधिग्रहण तथा अप्रोच रोड बनाने की इस परियोजना पर कुल मिलाकर 200 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि ऊना-बीहड़ू सड़क का सुदृढ़ीकरण किया जा चुका है तथा अब यहां पर वर्षा शालिकाएं, शौचालय व अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए स्थान चिन्हित किए जा रहे हैं। मंदली में पर्यटकों के लिए आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है। अंदरौली में गोबिंद सागर झील में जल क्रीड़ाओं का ट्रायल सफल रहा है तथा यहां आने वाले पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाएं जुटाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि पुल के दूसरे छोर पर यानी लठियाणी की ओर भी सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि कुटलैहड़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चंडीगढ़ व पंजाब के साथ सटा होने के चलते ऊना जिला का कुटलैहड़ विस क्षेत्र वीकेंड पर्यटन गतिविधियों का केंद्र बन कर उभर रहा है। क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी तो इससे यहां की आर्थिकी भी मजबूत होगी तो वहीं लठियाणी और मंदली के बीच का फासला भी कम हो जाएगा, जिससे हमीरपुर की ओर जाने वाले यात्रियों का समय भी बचेगा। 

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