Lok Sabha Election : भाजपा के गढ़ कांगड़ा में कांग्रेस ने आनंद शर्मा पर खेला दांव

कांग्रेस ने कांगड़ा संसदीय सीट से वर्ष 2004 में चुनाव जीता था, जिसके बाद लगातार तीन बार हारती रही। उससे पहले भी दो चुनाव यहां भाजपा के कद्दावर नेता एवं पूर्व सीएम शांता कुमार जीते थे।
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भाजपा का गढ़ बनते जा रहे संसदीय क्षेत्र कांगड़ा को भेदने के लिए कांग्रेस ने आनंद शर्मा पर बड़ा दांव खेल उन्हें सियासी रण में उतारा है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस ने वर्ष 2004 में चुनाव जीता था। इसके बाद लगातार तीन बार हार का सामना करना पड़ा है। उससे पहले भी दो चुनाव यहां भाजपा के कद्दावर नेता शांता कुमार जीते थे। जातीय सियासत के लिए मशहूर कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा ने ब्राह्मण चेहरों पर दांव खेला गया है। भाजपा ने डॉ. राजीव भारद्वाज को कांगड़ा से प्रत्याशी बनाया है।

भाजपा का गढ़ बनते जा रहे संसदीय क्षेत्र कांगड़ा को भेदने के लिए कांग्रेस ने आनंद शर्मा पर बड़ा दांव खेल उन्हें सियासी रण में उतारा है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस ने वर्ष 2004 में चुनाव जीता था। इसके बाद लगातार तीन बार हार का सामना करना पड़ा है। उससे पहले भी दो चुनाव यहां भाजपा के कद्दावर नेता शांता कुमार जीते थे। जातीय सियासत के लिए मशहूर कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा ने ब्राह्मण चेहरों पर दांव खेला गया है। भाजपा ने डॉ. राजीव भारद्वाज को कांगड़ा से प्रत्याशी बनाया है।

बड़ा नाम घोषित कर कांग्रेस के सभी नेताओं को कांगड़ा में एक छत के नीचे लाने की रणनीति है। हालांकि, आनंद के खिलाफ भाजपा कांगड़ा में बाहरी नेता का मुद्दा खड़ा करने की कोशिश जरूर करेगी। उसका भी तोड़ इसी प्रचार से होगा कि आनंद शर्मा हिमाचल मूल के बड़े नेता गिने जाते हैं, न कि महज जन्मभूमि शिमला के ही। राज्यसभा में विपक्ष के उप नेता, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री, विदेश राज्य मंत्री जैसे बड़े पदों पर रह चुके आनंद शर्मा को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस हाईकमान ने सबको चौंकाने दिया है।


राज्यसभा सदस्य रहते हुए आनंद उस समय भी केंद्रीय मंत्री थे, जब हिमाचल से वीरभद्र सिंह केंद्र में मंत्री बने थे। ऐसा माना जाता है कि आनंद के वीरभद्र सिंह से संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। जब वीरभद्र के विरोध के बावजूद सुखविंद्र सिंह सुक्खू कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बने थे तो आनंद शर्मा उनके शुभचिंतकों में शामिल थे। उस वक्त आनंद शर्मा अनेक बार सुक्खू की ढाल भी बने। ऐसे में यह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर भी बड़ी जिम्मेवारी होगी कि अब उनसे लोकसभा की दहलीज पार करवाने के लिए अपने रण कौशल का इस्तेमाल करें।

अब यह आनंद शर्मा के लिए भी उनके राजनीतिक करियर में करो या मरो जैसी स्थिति है। क्योंकि अगर जीते तो उनका कद कायम रहेगा, लेकिन हारे तो सियासी भविष्य संकटपूर्ण हो सकता है। आनंद पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने एक बार 1982 वर्ष शिमला से विधानसभा चुनाव भी लड़े थे, लेकिन उन्हें भाजपा के दौलत राम के सामने हार का सामना करना पड़ा था। आनंद शर्मा का जन्म 5 जनवरी 1953 को हुआ। आनंद शर्मा पीए शर्मा और प्रभा रानी शर्मा के बेटे हैं। इनका जन्म हिमाचल के शिमला में हुआ। 

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