वेतन आयोग रिपोर्ट से निराश हो रहे अधिकांश शिक्षक : Vijay Heer

वर्ष 2009 के पे मैट्रिक्स को ही वेतन का लेवल फिक्स करने के लिए तय किया गया है जबकि 2011 में पुनः संशोधित स्केल के लिए 10300 - 34800 पे बैंड में नई ग्रेड पे के कॉलम में लेवल फिक्स करने का कोई विकल्प 2.25 गुणांक के तहत नहीं मिला है।
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हमीरपुर ।   प्रदेश सरकार ने आखिरकार वेतन आयोग (Pay Commission) के संदर्भ में अधिसूचना जारी कर दी है, मगर अधिकांश शिक्षक इससे खुश नहीं  हैं क्योंकि न्यूनतम 15 प्रतिशत वेतन बढ़ाने का न कोई विकल्प दिया गया है और न ही दिए गए पे बैंड इसे सुनिश्चित कर रहे हैं। वर्ष 2009 के पे मैट्रिक्स को ही वेतन का लेवल फिक्स करने के लिए तय किया गया है जबकि 2011 में पुनः संशोधित स्केल के लिए 10300 - 34800 पे बैंड में नई ग्रेड पे के कॉलम में लेवल फिक्स करने का कोई विकल्प 2.25 गुणांक के तहत नहीं मिला है।

नए पे मैट्रिक्स में पदोन्नति तिथि से लाभ लेने पर भी 2009 के स्केल अनुसार वेतन निर्धारण करने से फायदा नहीं मिलेगा। केंद्रीय स्केल की तुलना करें तो सूबे के शिक्षकों को मूल वेतन में ही काफी घाटा हो रहा है और वर्तमान मूल वेतन में वर्तमान डी ए मिलाने पर जो मूल वेतन मिलना चाहिए, उतना मूल वेतन भी इस वेतन निर्धारण में नहीं दिख पा रहा ।

यह जानकारी देते हुए राजकीय टीजीटी (TGT) कला संघ महासचिव विजय हीर (Vijay Heer) ने कहा कि ए सी पी एस 4-9-14 के लाभ भी रोक दिए गए हैं और पंजाब वेतन आयोग (Pay Commission) के भत्तों सहित वेतन आयोग की कोई रूपरेखा नहीं दी गई है जिससे यह वेतन आयोग की रिपोर्ट फायदेमंद नहीं लग रही। कुछ वर्गों को छोड़कर अधिकांश शिक्षक वर्ग इससे निराश हुआ है और पंजाब की तर्ज़ पर एमएबीपी  विकल्प की मांग करते हैं।

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