पदोन्नति की पात्रता शर्तों में एकरूपता लाए शिक्षा विभाग

 जेबीटी से मुख्य शिक्षक, मुख्य शिक्षक से केंद्रीय मुख्य शिक्षक, केंद्रीय मुख्य शिक्षक से खंड प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी , खंड प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी से जिला शिक्षा उप-निदेशक पदोन्नति हेतु कोई परीक्षा नहीं ली जाती है । प्रधानाचार्य से उप-निदेशक जैसी पदोन्नतियों हेतु भी ऐसी कोई विशेष विभागीय परीक्षा नहीं ली जाती है। इस तरह एक ही पद से अगले पद पर पदोन्नति के मापदंड अलग-अलग हैं।
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  हमीरपुर ।   हिमाचल प्रदेश में  विभागीय परीक्षा का प्रावधान भी दोहरे मापदण्डों में उलझा हुआ है। शिक्षा नीति नई हो या पुरानी, शिक्षकों के लिए दोहरे पदोन्नति मानक चिंता का कारण बने हुए हैं। एक तरफ मुख्याध्यापक से प्रधानाचार्य पदोन्नति के लिए कोई विभागीय परीक्षा अनिवार्य नहीं है, मगर प्रवक्ता से प्रधानाचार्य पदोन्नति में विभागीय परीक्षा एक अनिवार्य शर्त है। इसी तरह टीजीटी से प्रवक्ता स्कूल न्यू पदोन्नति हेतु अब टीईटी अनिवार्य होने जा रहा है और टीजीटी और प्रमोटी प्रवक्ता से हेडमास्टर बनने के लिए कोई पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त नहीं लगाई गई है ।

यही हाल जेबीटी से टीजीटी पदोन्नति का है जिसमें व्यक्ति को टीईटी उत्तीर्ण करके ही पदोन्नति मिलती है मगर जेबीटी से मुख्य शिक्षक, मुख्य शिक्षक से केंद्रीय मुख्य शिक्षक, केंद्रीय मुख्य शिक्षक से खंड प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी , खंड प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी से जिला शिक्षा उप-निदेशक पदोन्नति हेतु कोई परीक्षा नहीं ली जाती है । प्रधानाचार्य से उप-निदेशक जैसी पदोन्नतियों हेतु भी ऐसी कोई विशेष विभागीय परीक्षा नहीं ली जाती है। इस तरह एक ही पद से अगले पद पर पदोन्नति के मापदंड अलग-अलग हैं। टीजीटी कला संघ अध्यक्ष सुरेश कौशल व महासचिव विजय हीर ने शिक्षा विभाग से पदोन्नति की पात्रता शर्तों में एकरूपता लाने हेतु नई शिक्षा नीति में चर्चा की अपील की है।


 हीर ने कहा कि कहीं अगली पदोन्नति केवल सेवा वरिष्ठता के तहत ही मिल जाती है तो कहीं पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना पदोन्नति मिल नहीं रही है और जूनियर कर्मचारी सीनियर से पहले प्रमोट होने के मामले भी उभरे हैं । टीजीटी से प्रवक्ता स्कूल न्यू कंप्यूटर विज्ञान पदोन्नति के लिए 5 साल की आईटी शिक्षण अनुभव की शर्त लगा दी गई है जिसके चलते पदोन्नति के रास्ते ही बंद किए गए हैं। पीईटी से डीपीई और  एलटी और शास्त्री को अब टीजीटी पदनाम बिना किसी पात्रता परीक्षा ही देय है मगर विभागीय नियमों में इस विरोधाभास से अनेकों शिक्षक पदोन्नत नहीं हो रहे हैं।

शिक्षक पात्रता परीक्षा में 50 प्रतिशत न्यूनतम अंकों की शर्त लगाने से हजारों शिक्षक पदोन्नति हेतु पात्रता परीक्षा देने का फार्म तक भरने से वंचित हो रहे हैं जिसके चलते परीक्षा में बैठने के अवसरों से भी वे वंचित शिक्षक वरिष्ठ होने के बावजूद पदोन्नति से वंचित हो रहे हैं । शिक्षक चुना हुआ पदोन्नति चैनल भी नहीं बदला जा सकते हैं और कई शिक्षक जेबीटी से पहले टीजीटी बनने हेतु टीईटी उत्तीर्ण कर प्रमोट हुए तो अब टीजीटी से प्रवक्ता स्कूल न्यू पदोन्नति हेतु फिर से टीईटी देंगे । इस व्यवस्था में गुणात्मकता लाने हेतु विशेष सुधार आपेक्षित है । संघ ने कक्षा 9 से 12 के स्कूल खोलने और मल्टी टास्क वर्कर्स के पद भरने को स्वीकृति देने हेतु सरकार का आभार जताया है ।

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