कोविड काल में कहां था बीजेपी का नेता, चुनाव में पूछ रही है बड़सर की जनता : इंद्रदत्त लखनपाल

इंद्रदत्त लखनपाल नेकहा कि मैं जन सेवा के मकसद को लेकर राजनीति में आया हूं और पिछले 10 सालों से इस सेवा भावना के मकसद पर खरा उतरने का भरपूर प्रयास कर रहा हूं । उसी के अनुसार मुझे बड़सर की जनता का भरपूर स्नेह, समर्थन के साथ सम्मान मिल रहा है।
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हमीरपुर ।  मैं जन सेवा के मकसद को लेकर राजनीति में आया हूं और पिछले 10 सालों से इस सेवा भावना के मकसद पर खरा उतरने का भरपूर प्रयास कर रहा हूं । उसी के अनुसार मुझे बड़सर की जनता का भरपूर स्नेह, समर्थन के साथ सम्मान मिल रहा है। यह बात कांग्रेस प्रत्याशी एवं  विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने दांदडु़ बेल्ट व ग्यारा ग्रां, बिझड़ी क्षेत्रों में चुनावी जन सभाओं को संबोधन देते हुए कही है।

लखनपाल बोले कि न उन्होंने कभी किसी से अभद्रता की, न ही वह अभद्रता व धौंस-दबाव राजनीति के पक्षधर हैं। नेता जनता का सेवक होता है और सेवक को अपनी मर्यादा में रहना जरुरी होता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के अवसर पर जनता से आंख मिलाने की हिम्मत न कर पाने वाले नेताओं को अपना आचरण सुधारना जरूरी है। इंद्र बोले कि बड़सर में इस बार चुनाव बीजेपी और बीजेपी के बीच ही हो रहा है। क्योंकि बीजेपी का एक वरिष्ठ कार्यकर्ता को उन्हीं की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चुनाव में उतारा है। इन चुनावी समीकरणों के चलते कांग्रेस के पक्ष में बड़सर का चुनाव एक तरफा हो कर रह गया है।

बीजेपी से बीजेपी की इस चुनावी भिडं़त में नेतृत्व के प्रति आम जनता का ही नहीं बल्कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं का भरोसा भी खत्म हुआ है। यही कारण है कि चुनाव प्रचार में कांग्रेस की चुनाव प्रचार टीमों के साथ  बीजेपी विचारधारा वाले कई नेता खुलकर सामने आ रहे हैं जबकि कई नेता परोक्ष रूप में कांग्रेस की जीत की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी की चुनावी डोर अभी भी उसी नेता के हाथ है जिस नेता से सारा बड़सर व उनकी पार्टी के तमाम कार्यकर्ता नाराज व नासाज हैं।

बड़सर में बीजेपी का प्रत्याशी तो मात्र चुनावी मोहरा है। जबकि पर्दे के पीछे चुनाव भी कोई और लड़ रहा है और सत्ता पर काबिज होने के लिए भी कोई और मंसूबे बना रहा है लेकिन बड़सर की जनता सब जानती है। इसलिए चुनाव में बीजेपी को पूरी तरह दरकिनार कर रही है। बीजेपी का नेता कोविड काल में कहां रहा, जनता चुनाव में यह सवाल पूछ रही है और उसे साफ बता रही है कि जो संकट व सुख-दुख में जनता के बीच रहा है, वोट का असली हकदार वही है।

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