Himachal Political Crisis : कांग्रेस के बागियों को टिकट, भाजपा को अपनों को मनाना होगी चुनौती

हिमाचल प्रदेश में सत्तासीन कांग्रेस के बाद अब भाजपा में भी बगावत शुरू हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस के छह बागियों को विधानसभा उपचुनाव में टिकट तो दे दिए, मगर पार्टी के सामने अब अपने ही बागियों को मनाने की बड़ी चुनौती है।
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हिमाचल प्रदेश में सियासी उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। सत्तासीन कांग्रेस के बाद अब भाजपा में भी बगावत शुरू हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस के छह बागियों को विधानसभा उपचुनाव में टिकट तो दे दिए, मगर पार्टी के सामने अब अपने ही बागियों को मनाने की बड़ी चुनौती है। हालांकि बगावत के मामले में भाजपा को अनुशासित माना जाता है। मगर कई स्थापित नेताओं की महत्वाकांक्षाएं पार्टी के आड़े आ सकती हैं। 

हिमाचल प्रदेश में सियासी उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। सत्तासीन कांग्रेस के बाद अब भाजपा में भी बगावत शुरू हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस के छह बागियों को विधानसभा उपचुनाव में टिकट तो दे दिए, मगर पार्टी के सामने अब अपने ही बागियों को मनाने की बड़ी चुनौती है। हालांकि बगावत के मामले में भाजपा को अनुशासित माना जाता है। मगर कई स्थापित नेताओं की महत्वाकांक्षाएं पार्टी के आड़े आ सकती हैं। 

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प्रदेश में चल रहे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस और भाजपा में रोजाना नए सियासी गणित बन रहे और बिगड़ भी रहे हैं। कांग्रेस के बागी विधायकों और निर्दलियों के भाजपा में शामिल होने से कई नेताओं में नाराजगी बढ़ गई है। इससे उन विधानसभा क्षेत्रों में भीतरघात हो सकता है, जिनमें वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी चुनाव हारे हैं। इन नेताओं में चिंता है कि बागियों और निर्दलियों को विधानसभा प्रत्याशी बनाए जाने से उनके भविष्य क्या होगा। 

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इन भाजपा नेताओं पर अब कांग्रेस पार्टी की पैनी नजर है। इन नेताओं को कांग्रेस में शामिल करने के लिए भी मंत्रणा चल रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी इसे इशारों-इशारों में ही कह भी गए हैं। लोकसभा चुनाव के लिए अभी तक कांग्रेस के प्रत्याशी घोषित न करने के पीछे यह भी कारण माना जा रहा है। लाहौल-स्पीति विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के विधायक रहे रवि ठाकुर के भाजपा में शामिल होने से पूर्व मंत्री रामलाल मारकंडा ने भी समर्थकों के साथ इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने का एलान किया है। 

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कुटलैहड़ से पांच बार विधायक रहे वीरेंद्र कंवर के समर्थक भी कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए देवेंद्र कुमार भुट्टो को पार्टी टिकट देने से खुश नहीं हैं। वह कुटलैहड़ में देवेंद्र कुमार भुट्टो के स्वागत कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए हैं। इससे उनमें भी साफ तौर पर नाराजगी देखी जा रही है। उधर, नालागढ़ के निर्दलीय विधायक केएल ठाकुर के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा के प्रत्याशी रहे लखविंद्र राणा ने धोखा होने की बात कही और वह भाजपा के मंच पर ही भावुक हो गए। 

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देहरा से होशियार सिंह के भाजपा में शामिल होने से रमेश धवाला भी नाराज हैं। चैतन्य शर्मा के भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद गगरेट से पिछले विधानसभा चुवानों में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी रहे और पूर्व में विधायक रह चुके राकेश कालिया ने भी पार्टी से त्यागपत्र दे दिया। इसी तरह कुछ अन्य हलकों में भी असंतोष है। इसका डैमेज कंट्रोल भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। अब देखना यह होगा कि विधानसभा उपचुनाव और लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने नाराज नेताओं को कैसे मनाती है।

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