बड़सर क्षेत्र में वेटनरी अस्पतालों में फार्मासिस्ट के पद लंबे समय से खाली

वेटनरी अस्पताल में रक्त सम्बधी टेस्ट व एक्सरे सुविधा भी उपलब्ध नहीं  है।  लोगों को जानवरों का टेस्ट करवाने के लिए बाहर का रुख करना पड़ता है। 
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वेटनरी अस्पताल

हमीरपुर ।   बड़सर उपमंडल के तहत आने वाले वेटनरी अस्पतालों में पिछले काफी समय से स्वीकृत पद नहीं भरे गए हैं। इसके अलावा बड़सर उपमंडल के मुख्य वेटनरी अस्पताल में जानवरों के लिए रक्त सम्बधी टेस्ट की सुविधा व एक्सरे जैसी महत्वपूर्ण सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।  लोगों को जानवरों का टेस्ट करवाने के लिए बाहर का रुख करना पड़ता है। 


बताते चलें कि बड़सर के वेटनरी अस्पतालों में टेक्निकल स्टाफ  की भारी कमी चल रही। बड़सर उपमंडल में 8 में से 5 वेटनरी फार्मासिस्ट के पद पिछले काफी लंबे समय से खाली चल रहे हैं। जिसमें दरकोटी, बुम्बलू, बड़सर, गारली, धबडिय़ाना में कोई भी फार्मासिस्ट नहीं है। उपमंडलीय वेटनरी अस्पताल में पिछले दो साल से चीफ  वेटनरी फार्मासिस्ट ही नहीं है। इसी के साथ वेटनरी फार्मासिस्ट का स्वीकृत पद भी पिछले करीब डेढ़ साल से रिक्त पड़ा है, ऐसी स्थिति में इलाज करने वाले डॉक्टरों पर ही इस काम का बोझ भी आता है। एक डॉक्टर को फील्ड में जाकर जगह जगह बीमार पशुओं को देखना पड़ता है।

वहीं दूसरी तरफ  डाटा एंट्री से लेकर दवाइयां देने तक का काम भी उन्हें बिना किसी की सहायता से करना पड़ता है। ऐसे में काम करने वाले डॉक्टरों पर भी बोझ बढ़ रहा है और दूसरी तरफ  आम जनता को भी असुविधा होती है।  जिसमें ऐसे में विभाग ने अपने बूते पर लोगों की ड्यूटी अलग अलग जगह निर्धारित की है। गौरतलब है कि धूमल सरकार में हर पंचायत में एक वेटनरी डिस्पेंसरी खोली गई थी। आज भी वो डिस्पेंसरी चलन में है, लेकिन वहां पर नियमित तौर पर सरकारी भर्तियां नहीं की जाती हैं और बेरोजगारी के इस काल में युवाओं को उन पंचायत स्तर की वेटनरी डिस्पेंसरीज में भर्ती किया जाता है।

वहीं दूसरी तरफ  सरकार द्वारा स्वीकृत पदों को नहीं भरकर उन्हीं अनियमित लोगों से काम करवाया जा रहा है। ऐसे में जहां वर्तमान में जो स्टाफ  काम कर रहा है, उस पर अधिक बोझ पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ  लोगों को भी उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अगर टेस्ट सुविधाओं की बात की जाए, तो बड़सर उपमंडल के मुख्य वेटनरी अस्पताल में जानवरों के लिए रक्त सम्बधी टेस्ट की सुविधा व एक्सरे जैसी महत्वपूर्ण सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। लोगों को जानवरों का टेस्ट करवाने के लिए बाहर का रुख करना पड़ता है।

गौर रहे कि हर जिले में पशुओं के लिए एक पालीक्लिनिक होता है जहां पर अधिक सुविधाओं के साथ अधिक डॉक्टर काम करते हैं। लेकिन पूरे हमीरपुर जिला में पशुओं के लिए कभी कोई पोलीक्लीनिक बनाया ही नहीं गया। गौरतलब है कि अधिकतर जिलों में ऐसे पोलीक्लीनिक बने हुए हैं। ऐसे में बड़सर के पशुओं को बड़े इलाज के लिए पालमपुर या किसी अन्य स्थान पर ले जाना पड़ता है। जिसमें उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। 


उधर डॉक्टर सुनील शर्मा ने बताया कि बुम्बलू को छोड़ कर दरकोटी, गारली, धबडिय़ाना और बड़सर में फार्मासिस्ट की पोस्ट पिछले एक साल से रिक्त है, लेकिन हमने काम सुचारू रूप से चला कर रखा हुआ है। उन्होंने कहा कि पशुओं को हर सम्भव इलाज समय पर मुहैया करवाया जा रहा है। ऐसे में सरकार चाहे जितने मर्जी भाषणों में जो मर्जी कह लें, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है, जो आपको अस्पतालों का जायजा लेकर ही पता चलेगा। 

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