कोरोना महासंकट से जूझता संसार और योग का महत्व, रखें इन बातों का ध्यान

वर्तमान समय में जब संपूर्ण विश्व कोविड-19 महामारी से प्रभावित है तो योग विद्या एक समाधान के रूप में सभी के समक्ष है। आयुर्वेद के दो प्रमुख लक्ष्य हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य का रक्षण तथा दूसरा रोगी व्यक्ति के रोगों का उपचार। वर्तमान में शरीर प्रतिरक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए आसन
 | 
कोरोना महासंकट से जूझता संसार और योग का महत्व, रखें इन बातों का ध्यान

वर्तमान समय में जब संपूर्ण विश्व कोविड-19 महामारी से प्रभावित है तो योग विद्या एक समाधान के रूप में सभी के समक्ष है। आयुर्वेद के दो प्रमुख लक्ष्य हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य का रक्षण तथा दूसरा रोगी व्यक्ति के रोगों का उपचार। वर्तमान में शरीर प्रतिरक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए आसन व प्राणायाम के अभ्यास पर विशेष बल दिया जा रहा है।

कोविड-19 महामारी के कारण ही नहीं, अपितु यदि हम वर्तमान जीवन शैली को देखें तो योग की आवश्यकता को प्रमुखता से पाएंगे, क्योंकि प्राचीन समय के रहन-सहन व जीवनशैली से वर्तमान समय की जीवन शैली बहुत भिन्न है। विकास की दौड़ में व्यक्ति अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान नहीं दे रहा है जिस कारण मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मानसिक तनाव ,अनिद्रा आदि अनेकों बीमारियां की संख्या में वृद्धि हुई है। सामान्य तौर पर हम देखें तो इन सभी समस्याओं का मुख्य कारण हमारी जीवनशैली व खान-पान की आदतें हैं यदि हम अपनी दैनिक दिनचर्या पर ध्यान दें तो काफी हद तक स्वस्थ रह सकते हैं।कोरोना महासंकट से जूझता संसार और योग का महत्व, रखें इन बातों का ध्यानवर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखकर इस लेख के माध्यम से दैनिक दिनचर्या किस प्रकार की होनी चाहिए के विषय में उल्लेख किया गया है। वर्तमान समय में हम आम तौर पर देखते हैं कि प्रात काल में जल्दी उठने की प्रथा समाप्त हो चुकी है। देररात्रि तक कार्य करना, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अत्यधिक प्रयोग, देरी से रात्रि भोजन इत्यादि आदतों के कारण सोने व जागने के नियमों में परिवर्तन आया है। इस कारण नींद पूर्ण नहीं होती और दिन की शुरुआत आम तौर आलस्य के साथ होती है। स्वाभाविक है कि दैनिक कार्यों में रुचि, ऊर्जा कम होगी, यदि रात्रि में समय से सोने की आदत को प्रातः काल जल्दी जागने आरंभ कर दें। विभिन्न परिवर्तन स्वतः अनुभव करेंगे। इस सामान्य परिवर्तन से दिन की शुरुआत ऊर्जा के साथ होगी, मन प्रसन्न रहेगा।कोरोना महासंकट से जूझता संसार और योग का महत्व, रखें इन बातों का ध्यानइसके साथ ही प्रातः काल जागने के पश्चात एक गिलास हल्का गर्म पानी का सेवन करना चाहिए। इसके लाभ हैं एक तो यह आपकी पाचन शक्ति में सहायक होता है और इससे मेटाबॉलिज्म आपका तेज होता है। शरीर से मल शोधन में भी यह सहायता करता है। तुलसी, गिलोय, नीम, लहसुन, हल्दी, शहद इत्यादि औषधि का भी सेवन कर सकते हैं। सभी औषधीय गुणों से परिपूर्ण है तथा उत्तम स्वास्थ्य के लिए सहायक है।

10 से 15 मिनट तक प्राणायामकोरोना महासंकट से जूझता संसार और योग का महत्व, रखें इन बातों का ध्यानदैनिक दिनचर्या में व्यायाम का भी अहम स्थान है। प्रातः काल में लगभग 30 मिनट तक योगाभ्यास करते हैं तो आपके उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करेगा व दिन भर में होने वाले कार्यों के लिए ऊर्जा प्रदान करेगा। इस योगाभ्यास में हम सामान्यता हर श्रेणी के लिए सूक्ष्म योगिक क्रियाएं तथा सूर्य नमस्कार का प्रतिदिन अभ्यास भी उत्तम होगा। परंतु ध्यान रहे अभ्यास अपनी क्षमता अनुसार ही करें। इसके अतिरिक्त 10 से 15 मिनट तक प्राणायाम का अभ्यास करें। इसमें मुख्य रुप से नाड़ी शोधन, भ्रामरी प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास प्रतिदिन सभी व्यक्तियों को करना चाहिए। यदि अभ्यास करने में असहजता हो तो प्रातःकालीन सैर भी एक अच्छा माध्यम हो सकता है।

यह होगी डाइट तो नजदीक नहीं फटकेंगी बीमारियांकोरोना महासंकट से जूझता संसार और योग का महत्व, रखें इन बातों का ध्यानप्रातः कालीन भोजन पौष्टिक व अधिक लेना चाहिए, क्योंकि यही पूरा दिन कार्य करने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। उसके पश्चात दोपहर का भोजन थोड़ा कम, रात्रि का भोजन बहुत ही कम होना चाहिए। रात्रि में शारीरिक श्रम अधिक न होने के कारण भोजन मात्रा कम रखनी चाहिए। अल्पाहारी व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। योग में अल्पाहार के विषय में वर्णन मिलता है कि व्यक्ति को 50% भोजन 25% जल का सेवन करना चाहिए। 25% खाली छोड़ देना चाहिए। यदि इस नियम को अपनाएंगे तो पाचन संबंधी अधिकतर बीमारियों से बच सकते हैं। भोजन में मुख्य रूप से फल व सब्जियां का अधिक प्रयोग तथा अंकुरित अनाज का सेवन लाभकारी होगा।

खाते वक्त पानी का सेवन कमकोरोना महासंकट से जूझता संसार और योग का महत्व, रखें इन बातों का ध्यानभोजन के साथ- साथ हमें जल कब का कितना लेना है इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए ना तो अत्याधिक सेवन उचित है कम से उचित है तो पानी भोजन के 1 घंटे पूर्व तथा भोजन के 1 घंटे पश्चात सेवन करें, लगभग 2 से 3 लीटर जल का प्रतिदिन सेवन करना चाहिए।

औषधीय काढ़े का सेवनकोरोना महासंकट से जूझता संसार और योग का महत्व, रखें इन बातों का ध्यानवर्तमान समय में कोविड-19 की समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन दो बार हल्दी, अदरक, तुलसी, गिलोय, इलायची के औषधीय काढ़े का सेवन कर सकते हैं। यदि यह सामान्य बदलाव अपनी दिनचर्या में लाते हैं तो कई विकारों से भी बच सकते हैं। उत्तम स्वस्थ जीवन यापन कर सकते हैं।

लेखिका- दीपिका वर्मा, शोधार्थी योग विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय

Tags

फेसबुक पर हमसे जुड़ने के लिए यहांक्लिक  करें। साथ ही और भी Hindi News (हिंदी समाचार) के अपडेट पाने के लिए हमेंगूगल न्यूज पर फॉलो करें।