Pension के लालच में मरे हुए आदमी की तीन बार हुई मौत, हैरान कर देगा धोखाधड़ी का ये मामला

RNN DESK। पेंशन (pension) के लालच में एक शख्स को तीन बार मार देने का मामला सामने आया है। फ्रॉड का खुलासा तब हुआ जब बैंक के कर्मचारी के पास एक मृतक के खाते में जमा पेंशन की रकम निकालने के लिए तीन-तीन मृत्यु प्रमाणपत्र जमा किए गए। छानबीन से पता चला कि 40 साल
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Pension के लालच में मरे हुए आदमी की तीन बार हुई मौत, हैरान कर देगा धोखाधड़ी का ये मामला

RNN DESK। पेंशन (pension) के लालच में एक शख्स को तीन बार मार देने का मामला सामने आया है। फ्रॉड का खुलासा तब हुआ जब बैंक के कर्मचारी के पास एक मृतक के खाते में जमा पेंशन की रकम निकालने के लिए तीन-तीन मृत्यु प्रमाणपत्र जमा किए गए। छानबीन से पता चला कि 40 साल के एक व्यक्ति के खाते में पिछले 10 साल से वृद्धावस्था पेंशन की रकम आ रही थी।

 

दरअसल ये खाता स्टेट बैंक आफ इंडिया की ग्वालटोली शाखा में साल 2001 में खोला गया था। खाता धारक का नाम मोहम्मद हलीम है। खाते में फिलहाल 52,899 रुपए हैं। इस खाते से साल 2011 से पैसे नहीं निकाले जाने के कारण ब्याज भी जमा हो रहा था। साथ ही पिछले साल दिसंबर तक हर महीने वृद्धावस्था पेंशन की रकम भी आ रही थी।

 

यूं हुआ मामले का खुलासा

27 जनवरी को ग्वालटोली शाखा में अर्शी खान नामक एक महिला ने बताया कि उसके पिता हलीम का देहांत साल 2017 में हो गया था और उसे उस खाते में जमा पैसे निकालने थे। इसके बाद बैंक कर्मचारी की तरफ से साल 2017 तक की रकम का स्टेटमेंट दिया गया। महिला ने खाते के भुगतान से जुड़े फॉर्म भरकर बैंक कर्मचारी को दिए। बैंक में जमा रकम निकालने के लिए डॉक्यूमेंट्स के साथ खाताधारक का डेथ सर्टिफिकेट लगाना अनिवार्य होता है। महिला से सर्टिफिकेट मांगने पर उसने अपने कथित पिता के मौत के 2011 का डेथ सर्टिफिकेट लगाया।

 

जब बैंक अपसरों ने पूछा कि आपके पिता की मौत साल 2017 में हुई थी तो वो 2011 का सर्टिफिकेट कैसे लगा रही है। इसपर अर्शी जवाब नहीं दे सकी। जब अफसरों ने उससे असली डेथ सर्टिफिकेट मांगां तो वो एक सर्टिफिकेट ले आई। इसमें उसके पिता के मौत का साल 2018 दर्ज था।

 

एक ही व्यक्ति के तीन-तीन डेथ सर्टिफिकेट देख बैंक अफसर चकरा गए। बैंक के अधिवक्ता को बुलाया गया। हालांकि इस दौरान हलीम को अपना पिता बताने वाली महिला फरार हो चुकी थी। बैंक ने खाते के भुगतान पर रोक लगा दी है। हिन्दूस्तान के रिपोर्ट के मुताबिक जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विभाग से तीनों की जांच कराई तो वर्ष 2011 का डेथ सर्टिफिकेट असली और बाकी दो फर्जी निकले।

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