नवजात की मौतः वनमंत्री राकेश पठानिया ने टीएमसी से 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट

धर्मशाला/कांगड़ा। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में नवजात की मौत के मामले में वनमंत्री राकेश पठानिया ने 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की है। राकेश पठानिया ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज (टीएमसी) प्रबंधन 24 घंटे में मामले की जांच कर, उन्हें रिपोर्ट सौंपे। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की लापरवाही के कारण हिमाचल सरकार
नवजात की मौतः वनमंत्री राकेश पठानिया ने टीएमसी से 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट

धर्मशाला/कांगड़ा। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में नवजात की मौत के मामले में वनमंत्री राकेश पठानिया ने 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की है। राकेश पठानिया ने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज (टीएमसी) प्रबंधन 24 घंटे में मामले की जांच कर, उन्हें रिपोर्ट सौंपे। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की लापरवाही के कारण हिमाचल सरकार की देशभर में निंदा हा रही है, ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन त्वरित जांच व कार्रवाई की रिपोर्ट सरकार को सौंपे।

 

 

जानकारी के अनुसार 13 अगस्त को टीएमसी में हुई नवजात की मौत के बाद सोमवार (16 अगस्त) को मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. भानू अवस्थी पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे थे। इस दौरान जहां डॉ. भानू ने परिवार को सांत्वना दी वहीं, घटना पर भी दुख जताया है। इस दौराना उन्होंने वनमंत्री एवं नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया के साथ दूरभाष पर संपर्क किया और मामले की पूरी जानकारी दी। यह जानकारी मृतक नवजात के दादा रशपाल सिंह राणा ने Reality News को दी।

 

 

उन्होंने वनमंत्री ने प्रिंसिपल को निर्देश दिए कि मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की लापरवाही से नवजात की मौत होना चौंकाने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की जांच की प्रगति की स्वयं निगरानी करेंगे। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन 24 घंटे में मामले की जांच पूरी कर कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि सरकार पर उठ रहे सवालों को भी विराम लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि घटना के बाद प्रदेश के साथ देशभर में कॉलेज प्रबंधन और सरकार की आलोचनाएं हो रही हैं।

 

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उधर, हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजीव सहजल ने कहा कि मामला सरकार के संज्ञान में आया है। सरकार मामले की छानबीन करने के बाद उचित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उल्लेखनीय है कि टांडा में प्रशिक्षु चिकित्सकों की लापरवाही के कारण प्रसव के दौरान नवजात के माथे पर लंबा कट लग गया। बच्चे को सात दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया। उसकी सांसों और धड़कन में दिक्कत आ रही थी, लेकिन नवजात की सात दिन बाद मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया के माध्यम से परिजनों ने इस मामले को सार्वजनिक किया है।

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