Padam Awards-2022: हिमाचल के विद्यानंद सरैइक और ललिता वकील को पद्मश्री अवॉर्ड
केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों (Padam Awards-2022) की घोषणा कर दी है। हिमाचल प्रदेश के दो लोगों को भी पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। हिमाचल प्रदेश के जिला चम्बा की ललिता वकील को कल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड देने का एलान किया गया है। इसके साथ ही सिरमौर जिले के देवठी-मझगांव क्षेत्र के विद्यानंद सरैइक को साहित्य और शिक्षा के लिए यह सम्मान दिया जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म अवार्ड पाने वालों की सूची जारी की गई है।
हिमाचल प्रदेश के चम्बा का रूमाल काफी प्रसिद्ध है। उस पर कलाकारी उकेरी जाती है। चम्बा रूमाल को नई बुलंदियों पर पहुंचाने का श्रेय चम्बा की ललिता वकील को ही जाता है। 50 वर्षों की मेहनत का ही नतीजा है कि उन्हें वर्ष 2018 में नारी शक्ति पुरस्कार से नवाजा गया था। ललिता वकील चम्बा की अकेली महिला हैं, जिन्हें तीसरी मर्तबा भारत सरकार ने राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा है। वह चम्बा शहर के चौंतड़ा मोहल्ला की रहने वाली हैं।
ललिता वकील को 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने सम्मानित किया था। इसके बाद 2012 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने शिल्प गुरु सम्मान से सम्मानित किया था। ये सम्मान पाने वाली ललिता वकील इकलौती हिमाचली हस्तशिल्पी हैं। ललिता वकील अपने घर में लड़कियों को चम्बा रूमाल की कला की बारीकियां सिखाती हैं। चम्बा का रूमाल अद्भुत कला और शानदार कशीदाकारी के कारण देश-विदेश में लोकप्रिय है। चम्बा रूमाल की कारीगरी मलमल, सिल्क और कॉटन के कपड़ों पर की जाती है। रूमाल पर कढ़ाई से तैयार की गई कलाकृति दोनों तरफ से एक जैसी दिखती है।
वहीं, विद्यानंद सरैइक कवि, गीतकार, गायक और शिक्षाविद् हैं और उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवार्ड समेत कई पुरस्कार मिल चुके हैं। सिरमौर के राजगढ़ क्षेत्र के देवठी मझगांव निवासी प्रसिद्ध साहित्यकार, कलाकार और लोकगायक विद्यानंद सरैक को साहित्य-शिक्षा क्षेत्र में पद्मश्री मिलने से खुशी की लहर है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्नातक तक शिक्षा हासिल की। 1959 से 1976 तक शिक्षा विभाग में अध्यापक रहे।
पारिवारिक पृष्ठभूमि के चलते चार वर्ष की आयु से ही वह करियाला (नाटक) मंच से जुड़ गए और लोक संस्कृति के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया और 81 वर्ष की आयु में भी वह लोक साहित्य, लोक संस्कृति के संरक्षण में जुड़े हुए हैं. वर्ष 1972 में उन्होंने पहाड़ी कविताओं की पुस्तकों का संग्रह चिट्टी चादर, होरी जुबड़ी, नालो झालो रे सुर भाषा एवं संस्कृति विभाग के साथ मिल कर किया। 200 से अधिक सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यानंद सरैक को 2018 में राष्ट्रपति अवार्ड से भी नवाजा गया।