कोरोना और कार्यक्रमों के आयोजन पर दोहरा मापदंड क्यों ?
हिमाचल प्रदेश में कोरोना के मामले फिर से बढ़ रहे हैं। सरकार तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों पर बात कर रही है। आम लोगों के लिए तमाम हिदायतें दी जा रही हैं। अगर मास्क नहीं पहना तो चालान किया जा रहा है। सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया… तो चालान। सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रम बिना अनुमति किए तो कानूनी उलझनों का पछड़ा। यानी आम लोग कुछ भी नहीं कर सकता है। ना तो वह बिना मास्क के बाजार में घूम सकता है और न ही सामाजिक दूरी का पालन किए बिना किसी कार्यक्रम का हिस्सा बन सकता है।
अगर निजी वाहन में भी तीन से ज्यादा लोग हुए तो मास्क पहनना जरूरी है। किसी तरह का आयोजन करना है तो संबंधित क्षेत्र के एसडीएम से पूर्व में अनुमति लेना जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार कोरोना का रोकने के लिए कदम उठा रही है। और किसी के घर में आयोजित कार्यक्रम में जरूरत से ज्यादा लोग आ गए तो उसकी जांच करना सरकार का अधिकार है। और कार्रवाई करने का हक भी रखती है। आम लोग तो सिर्फ आदेशों का पालन करने के लिए होते हैं। सरकार के नुमाइंदे, प्रशासनिक अधिकारी सरकार के निर्देशों का पालन करवाने के लिए होते हैं।
चम्बा जिला प्रशासन ने 8 अगस्त कोरोना की स्थिति को लेकर बैठक की थी। उपायुक्त ने इस दौरान साफ कहा था कि सामाजिक कार्यक्रमों में लोगों ने कोरोना को लेकर जारी एसओपी का पालन नहीं किया। इस कारण जिले में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। उस दौरान उन्होंने नो मास्क नो सर्विस व्यवस्था और सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन सुनिश्चित करवाने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व में जारी आदेशों के तहत किसी भी तरह के आयोजन या कार्यक्रम के लिए संबंधित एसडीएम की अनुमति लेना आवश्यक किया था। उल्लंघन की अवस्था में आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई करना सुनिश्चित किया था। उन्होंने अधिकारियों को सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उपायुक्त ने 8 अगस्त को कहा था कि जिला चम्बा में बढ़ रहे संक्रमण का मुख्य कारण सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान नियमों का पालन नहीं पाया गया है। उन्होंने सभी एसडीएम को निगरानी व्यवस्था को और पुख्ता बनाने को कहा था। मगर अब सवाल यह है कि क्या सरकारी कार्यक्रमों पर यह नियमों और दिशा-निर्देश लागू नहीं होते हैं। 15 अगस्त के दिन जिला चम्बा के अलग-अलग स्थानों पर तिरंगा रैलियां निकली। हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ शामिल हुई। बिना मास्क और सामाजिक दूरी का पालन किए लोग कोरोना को चुनौती देते दिखे। मगर क्या इस दौरान किसी के खिलाफ पुलिस अथवा प्रशासन ने कोई कार्रवाई की। अगर की होती तो मंगलवार यानी 17 अगस्त को भरमौर में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान यह लापरवाही देखने को नहीं मिलती।
भरमौर में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान करीब 8 से 10 हजार लोग एकत्रित हुए थे। जनसभा के दौरान कई लोग बिना मास्क पहने मुख्यमंत्री और अधिकारियों व पुलिस के सामने से गुजर रहे थे। किसी को पूछा तक नहीं। इतना ही नहीं जनसभा वाले स्थान पर बैठे लोग न तो हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते दिखे और न ही सामाजिक दूरी का पालन करते। अगर इस तरह की स्थिति किसी के घर अथवा किसी आम व्यक्ति द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान होती तो… उसको कानून से लेकर हर तरह के नियमों का पाठ पढ़ाया जाता। खैर सरकार कोई नियम और कानून बनाती है तो सबसे पहले कानून बनाने वालों को उसका पालन करते हुए नजीर पेश करनी चाहिए।
याद रखें दुनिया में प्रधानमंत्री को भी लगा है जुर्माना
वर्ष 2019 में चीन से निकली कोरोना महामारी का आज दुनिया के लगभग सभी देशों में प्रकोप जारी है। हर देश ने संक्रमण पर काबू पाने के लिए अपने स्तर पर कोशिशें की। लॉकडाउन जैसे कदम उठाए। कोरोना के लिए लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर जुर्माने और सख्त सजा का प्रावधान किया गया था। कोरोना के नियमों का ऐसा ही एक उल्लंघन अप्रैल 2020 में नॉर्वे में वहां की प्रधानमंत्री ने किया। इसलिए प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग को नॉर्वे की पुलिस ने जुर्माना लगा दिया। नॉर्वे की पुलिस ने कहा था कि पीएम एर्ना सोलबर्ग ने अपना 60वां जन्मदिन मनाने के लिए परिवार के लोगों को इकट्ठा किया था। सरकार ने देश में 10 से ज्यादा लोगों के एकत्रित होने पर पाबंदी लगाई हुई थी, मगर उनकी पार्टी में 13 लोग शामिल हो गए थे। ऐसे में उन्हें जुर्माना भरना पड़ा। उस वक्त नार्वे पुलिस ने कहा था कि ऐसे मामलों में जुर्माना नहीं लगाया जाता, लेकिन क्योंकि प्रधानमंत्री प्रतिबंध लगाने के काम में सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। इसलिए उन पर भी हमें जुर्माना लगाना पड़ा। पुलिस प्रमुख ने जुर्माने को जायज ठहराते हुए कहा, कानून सबके लिए एक जैसा है, लेकिन सब कानून की नजरों में एक नहीं हैं।