हिमाचल में इस साल फेल नहीं होंगे पांचवी और आठवीं कक्षा के छात्र

हिमाचल (Himachal) प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पांचवीं और आठवीं के छात्रों (student) को शिक्षा विभाग ने राहत दी है। हिमाचल (Himachal) के सरकारी स्कूलों (Gov’t school) में इस वर्ष पांचवीं और आठवीं का कोई भी छात्र (student) फेल नहीं होगा। कोरोना महामारी के कारण एक वर्ष तक नियमित कक्षाएं नहीं लगने के
 

हिमाचल (Himachal)  प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पांचवीं और आठवीं के छात्रों (student) को शिक्षा विभाग ने राहत दी है। हिमाचल (Himachal) के सरकारी स्कूलों (Gov’t school) में इस वर्ष पांचवीं और आठवीं का कोई भी छात्र (student) फेल नहीं होगा। कोरोना महामारी के कारण एक वर्ष तक नियमित कक्षाएं नहीं लगने के कारण शिक्षा विभाग ने यह फैसला लिया है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक ने हिमाचल के सभी शिक्षा उपनिदेशकों को यह आदेश जारी कर दिए हैं।

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पांचवीं और आठवीं के छात्रों को शिक्षा विभाग ने राहत दी है। इस बार दोनों कक्षाओं का कोई भी छात्र खराब प्रदर्शन के बावजूद फेल नहीं होगा। कोरोना महामारी के कारण पूरा साल नियमित कक्षाएं नहीं लगीं इसलिए यह राहत दी गई है। मूल्यांकन के आधार पर 33 फीसदी से कम अंक लेने वाले विद्यार्थियों की रिपोर्ट बनाई जाएगी। इसके बाद खराब प्रदर्शन वाले विद्यार्थियों को अप्रैल माह में नए शैक्षणिक सत्र के शुरू में पुराने पाठ्यक्रम की दोहराई करवाई जाएगी।

साल 2019 में ‌शिक्षा का अधिकार अधिनियम संशोधन 2019 को लागू करने का जयराम सरकार ने फैसला लिया था। इस अधिनियम में व्यवस्था की गई थी कि पांचवीं और आठवीं के छात्रों की वार्षिक परीक्षा में उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा। पहले व्यवस्था यह थी कि पहली से आठवीं तक के छात्रों को मूल्यांकन के आधार पर अगली कक्षा में प्रमोट किया जाता था। लेकिन कोरोना के कारण नियमित कक्षाएं नहीं लगी जिस वजह से नया निर्णय इस बार शिक्षा विभाग लागू नहीं करने जा रहा है। प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के निदेशक शुभकरण सिंह ने नए आदेश की पुष्टि की है।

नए शैक्षणिक सत्र के पहले महीने में होगी रिवीजन

एक अप्रैल 2021 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र के पहले महीने में सभी सरकारी स्कूलों में पुरानी कक्षा के पाठ्यक्रम की रिवीजन करवाई जाएगी। विद्यार्थियों को कोरोना संकट के बाद स्कूल आने पर नियमित पढ़ाई से जोड़ने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस बाबत सभी जिला उपनिदेशकों को निर्देश भी जारी हो गए हैं।