फाइलों में उलझा ‘फेयरवेल फंड’: CS की पार्टी का 1.22 लाख का बिल, किसके खाते में जाएगा खर्च?

हिमाचल के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की पार्टी का 1.22 लाख रुपये का बिल सरकार को भेजे जाने पर बवाल मचा है। भाजपा और सेवानिवृत्त अफसरों ने इसे टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी बताया है।
 

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना इन दिनों होली के मौके पर आयोजित एक निजी पार्टी को लेकर विवादों में घिर गए हैं। यह पार्टी शिमला स्थित राज्य सरकार के हॉलिडे होम होटल में आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 75 अधिकारी और उनके परिवार शामिल हुए थे। पार्टी का बिल 1.22 लाख रुपये आया है, जिसे पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को भुगतान के लिए भेजा गया।

हालांकि अब यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और विपक्षी दल भाजपा समेत सेवानिवृत्त नौकरशाहों ने इसका कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि एक निजी कार्यक्रम के लिए राज्य के खजाने से भुगतान किया जाना नैतिक रूप से अनुचित और प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ है।

भाजपा ने उठाए नैतिकता पर सवाल
भाजपा नेताओं ने इस पूरे प्रकरण को "सरकारी धन की बर्बादी" बताते हुए कहा कि मुख्य सचिव द्वारा दी गई निजी पार्टी का बिल सरकारी विभाग को भेजा जाना आचरण नियमों के विपरीत है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रकार की गतिविधियां टैक्सपेयर्स के पैसे के दुरुपयोग का उदाहरण हैं।

बिल का ब्योरा भी आया सामने
गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए बिल के मुताबिक, प्रति व्यक्ति भोजन का खर्च 1,000 रुपये था, जिससे 75 मेहमानों के लिए कुल 75,000 रुपये का बिल बना। इसके अलावा 22,350 रुपये GST, और ड्राइवरों व कर्मचारियों के भोजन पर 12,870 रुपये अतिरिक्त खर्च किया गया। बिल की कुल राशि 1,22,220 रुपये बताई जा रही है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर उठे सवालों के चलते अभी तक इस बिल का भुगतान नहीं किया गया है।

सेवा विस्तार के दिन हुई पार्टी
गौरतलब है कि 1991 बैच के आईएएस अधिकारी प्रबोध सक्सेना को राज्य सरकार ने 31 मार्च को सेवानिवृत्ति के दिन छह महीने का सेवा विस्तार दिया था। पार्टी 14 मार्च को आयोजित की गई थी, जिसे अब उनके फेयरवेल से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

एचपीटीडीसी पर भी सवाल
यह आयोजन जिस हॉलिडे होम होटल में हुआ, उसका संचालन हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम करता है, जो पहले से ही वित्तीय कुप्रबंधन और बकाया भुगतान को लेकर आलोचनाओं के घेरे में है। इससे पहले हाईकोर्ट ने भी निगम के कार्यों पर सवाल उठाए थे।

क्या कहते हैं पूर्व अधिकारी?
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और सरकार से स्पष्टता मांगी है कि क्या ऐसे निजी आयोजनों का खर्च सरकारी फंड से उठाया जाना उचित है