अब 'केरलम' कहलाएगा केरल, मोदी कैबिनेट ने नाम बदलने के प्रस्ताव को दी हरी झंडी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में केरल राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। यह निर्णय केरल राज्य विधानसभा द्वारा पूर्व में पारित किए गए उस प्रस्ताव के आधार पर लिया गया है, जिसमें राज्य के नाम को उसकी स्थानीय भाषा 'मलयालम' के अनुरूप करने का अनुरोध किया गया था।
केरल विधानसभा ने 24 जून, 2024 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव के अनुसार, मलयालम भाषा में राज्य का नाम ‘केरलम’ ही उच्चारित और लिखा जाता है। हालांकि, भारतीय संविधान की पहली अनुसूची में यह ‘केरल’ के रूप में दर्ज है। राज्य सरकार का तर्क है कि 1 नवंबर, 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के समय से ही मलयालम भाषी लोगों की यह मांग रही है कि राज्य का नाम उसकी अपनी भाषा के व्याकरण और उच्चारण के अनुकूल होना चाहिए। इसी सांस्कृतिक और भाषाई महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस पर अपनी सहमति जताई है।
मंत्रिमंडल की इस स्वीकृति के बाद अब आगामी कार्यवाही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संपन्न होगी। राष्ट्रपति द्वारा ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को केरल राज्य विधानसभा को विचार-विमर्श हेतु भेजा जाएगा। विधानसभा को एक निश्चित समय सीमा के भीतर इस विधेयक पर अपनी राय व्यक्त करनी होगी। राज्य की राय प्राप्त होने के बाद, भारत सरकार राष्ट्रपति की अनुशंसा प्राप्त कर इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत करेगी। संसद द्वारा साधारण बहुमत से पारित होने के बाद ही संविधान की पहली अनुसूची में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। गृह मंत्री अमित शाह की स्वीकृति के बाद, प्रस्ताव को विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग के पास कानूनी टिप्पणियों के लिए भेजा गया था। विधि मंत्रालय ने इस प्रस्ताव की संवैधानिक वैधता की जांच करने के बाद अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त की है। यह आधिकारिक बदलाव लागू होने के बाद सभी सरकारी दस्तावेजों, राजपत्रों और अंतरराष्ट्रीय पत्राचार में ‘केरल’ के स्थान पर ‘केरलम’ शब्द का प्रयोग किया जाएगा।