हिमाचल विजिलेंस में हड़कंप : SP ले रहीं थी बार-बार छुट्टियां, DGP ने बिठाया पैरेलल अफसर
शिमला/धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (SV&ACB) की उत्तरी रेंज, धर्मशाला में इन दिनों प्रशासनिक खींचतान और कामकाज के संकट ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तरी रेंज की पुलिस अधीक्षक (SP) अदिति सिंह (IPS) की बार-बार की छुट्टियों और कार्यालय से लंबी अनुपस्थिति के कारण ब्यूरो का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस के महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी ने एक कड़ा कार्यालय आदेश जारी कर व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।
छुट्टियों का 'ट्रैक रिकॉर्ड' बना चर्चा का विषय
DGP कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश (संख्या 4790) के अनुसार, यह नोट किया गया है कि SP अदिति सिंह पिछले तीन महीनों से लगातार विभिन्न प्रकार के अवकाश पर रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक
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जनवरी 2026: महीने की शुरुआत से लेकर मध्य तक वे तीन अलग-अलग चरणों में छुट्टियों पर रहीं।
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फरवरी 2026: 8 फरवरी से 22 फरवरी तक वे 15 दिनों के लंबे अवकाश (EL और SL) पर रहीं।
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दिसंबर 2025: इससे पहले वे नैनीताल में एक मिड-करियर ट्रेनिंग के कारण एक सप्ताह से अधिक समय तक मुख्यालय से बाहर थीं।
दस्तावेज में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इन छुट्टियों के कारण उत्तरी रेंज, धर्मशाला का कार्यालय कामकाज प्रतिकूल रूप से प्रभावित (Adversely Affected) हो रहा है।
ब्रह्म दास भाटिया को सौंपी कमान, साये की तरह रहेंगे साथ
कामकाज को सुचारू बनाने के लिए DGP ने एडिशनल SP ब्रह्म दास भाटिया (HPS) को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। आदेश के तहत, अब SP अदिति सिंह की अनुपस्थिति में सारा कार्यभार ब्रह्म दास भाटिया ही संभालेंगे।
हैरान करने वाली बात यह है कि DGP ने केवल अनुपस्थिति के दौरान ही नहीं, बल्कि SP की उपस्थिति में भी ब्रह्म दास भाटिया को उनके साथ संबद्ध रहने का निर्देश दिया है।
आदेश की प्रति के अनुसार:
कामकाज में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, श्री ब्रह्म दास भाटिया SP की उपस्थिति के दौरान भी उनके साथ जुड़े रहेंगे ताकि सरकारी कार्यों की कड़ी न टूटे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान पर ब्रेक?
विजिलेंस ब्यूरो जैसे संवेदनशील विभाग में SP स्तर के अधिकारी की लंबी अनुपस्थिति से कई महत्वपूर्ण जांचें और फाइलों का निपटारा अधर में लटका हुआ था। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि DGP का यह कदम एक सॉफ्ट डिमोशन या कड़ी चेतावनी की तरह है, जहां एक जूनियर अधिकारी को सीनियर के साथ साये की तरह लगा दिया गया है, ताकि जवाबदेही तय की जा सके। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिससे धर्मशाला विजिलेंस कार्यालय में हड़कंप की स्थिति है।