हिमाचल में एक ही कमरे में चल रहे 661 स्कूल, कार्यालय है या क्लासरूम पता नहीं, पढ़िए पूरी रिपोर्ट
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था का बहुत बुरा हाल है। हिमाचल के 10 हजार से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं, जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। हालत ये हैं कि 600 से ज्यादा प्राइमरी और मिडल स्कूल मात्र एक कमरे में चल रहे हैं। इन स्कूलों के कार्यालय कहां हैं अथवा क्लासरूम कहां हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं है। राजकीय प्रशिक्षित कला स्नातक संघ ने दावा किया है कि प्रदेशभर में 410 प्राईमरी और 251 मिडल स्कूल ऐसे हैं, जो मात्र एक कमरे में ही चल रहे हैं। वहीं, 249 मिडल तथा 2867 प्राईमरी स्कूलों में केवल 2 कमरे हैं। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल पाएंगी। राजकीय प्रशिक्षित कला स्नातक संघ ने मांग की है कि सरकार स्टार्स प्रोजेक्ट के तहत इन स्कूलों में मौलिक सुविधाएं प्रदान करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके।
राजकीय प्रशिक्षित कला स्नातक संघ प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल और प्रदेश महासचिव विजय हीर ने कहा कि वर्ष 2020-21 की यू-डाईज रिपोर्ट अनुसार प्रदेश के 410 प्राईमरी और 251 मिडल स्कूल एक कमरे में ही चल रहे हैं। 249 मिडल तथा 2867 प्राथमिक स्कूल केवल 2 कमरों वाले भवन में चल रहे हैं। यू-डाईज 2019-20 के अनुसार प्रदेश के 15398 सरकारी स्कूलों में से 11656 स्कूलों को कम्प्यूटर्स, 13245 स्कूलों को स्थायी इंटरनेट, 449 स्कूलों को बिजली कनेक्शन, 3069 स्कूलों को रैम्प, 15 स्कूलों को पेयजल सुविधा और 325 स्कूलों को बालक शौचालय और 203 स्कूलों को बालिका शौचालय, 12106 स्कूलों को दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शौचालय, 171 स्कूलों को हाथ-धोने के स्थल, 609 स्कूलों को पुस्तकालय चाहिए। गुणात्मक शिक्षा हेतु नवाचार प्रोत्साहित किया जाना आपेक्षित है।
हीर ने कहा कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत हर वर्ष एमआईएस-यूडाईज डाटा एकत्रित किया जाता है। इसकी प्रक्रिया को अक्तूबर से शुरू करने की आवश्यकता है। क्योंकि 30 सितंबर का डाटा ही बेसलाईन होता है। इसके आधार पर शिक्षा विभाग के द्वारा समस्त वार्षिक योजनाओं का निर्माण किया जाता है। प्रदेश में एमआईएस डाटा एकत्रित करने का काम अगर अक्तूबर माह में शुरू कर दिया जाए तो शीतकालीन अवकाश वाले स्कूलों में बर्फबारी और अवकाश के चलते डाटा एकत्र करने में होने वाले से विलंब को रोका जा सकता है। इसके अलावा यू-डाईज डाटा का एडवांस डाटा भी मिल जाएगा। जबकि वर्तमान में गत वर्ष का 30 सितंबर का डाटा होने के कारण मौजूदा स्थिति बदल चुकी होती है। एक साल पुराना डाटा प्रयोग करने की अपेक्षा वर्तमान डाटा इस्तेमाल करना बेहतर कदम होगा।