सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
जहां सतर्कता होती है, वहां शांति होती है। कोई डर भी नहीं होता। लापरवाही व अनदेखी के कारण ही अनहोनी घटनाएं जन्म लेती हैं। यह भी सही है कि अनहोनी न तो समय देखती है, न स्थान और न ही व्यक्ति। जहां कमियां होती हैं वहीं पर दिक्कतें जन्म लेती हैं। इसलिए जरूरी है कि व्यक्ति सतर्क रहें। जिस तरह तेजी से तकनीक उन्नत होती जा रही है, सुविधाएं बढ़ी हैं, उसी तेजी से परेशानियां भी बढ़ रही हैं। आज हर व्यक्ति किसी न किसी परेशानी से घिरा है जबकि उसके पास तमाम सुविधाएं भी हैं। यह सही है कि कुछ दिक्कतें प्राकृतिक होती हैं लेकिन कुछ परेशानियां लोग खुद पैदा करते हैं। लापरवाही व सतर्कता का अभाव भी समस्याएं बढ़ाता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग हमेशा सतर्क रहें और सुरक्षित रहें। यह कर्त नहीं भूलना चाहिए कि एक छोटी सी चूक बहुत बड़ा नुकसान कर जाती है।
सही है कि जब कहीं से प्यार मिले तो कोई दुख दर्द बांटने का प्रयास करे तो लोग उस पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं। वे यह कभी नहीं देखते सोचते कि उसके बारे में जानकारी भी ली जाए। कई बार तो अनजाने लोगों पर भी भरोसा कर लिया जाता है जो कई बार नुकसान का कारण भी बन जाता है। समाज में ठगी की बढ़ती वारदातों का कारण भी अनजान लोगों पर किया गया भरोसा ही बनता है। इस तरह की वारदातें बढऩा बताता है कि लोगों ने चेतना खे दी है और ठगी होने पर हाय तौबा मचाना उनकी आदत बन गई है। जबकि होना तो यह चाहिए कि किसी वारदात के बाद उससे सबक लिया जाना चाहिए। किसी घटना के कुछ दिन तक तो लोग सोचते हैं लेकिन फिर सब भूल जाते हैं। उधर, शातिर भी नई तरकीब निकाल कर लोगों को शिकार बना रहे हैं। कभी लॉटरी लगने का झांसा दिया जाता है, कभी लक्की ड्रॉ के नाम पर तो कभी विदेश भेजने के नाम पर लोगों को लूटा जा रहा है। हैरानी की बात है कि कई शातिर तो अपने शिकार के बारे में पहले पूरी जानकारी हासिल कर लेते हैं। हिमाचल प्रदेश में एक पूर्व बैंक अधिकारी से लाखों की ठगी किया जाना बताता है कि वे उसके बारे में सब कुछ जानते थे। इसी कारण उक्त व्यक्ति उनके जाल में फंस गया और लाखों रुपये गंवा बैठा। उधर यह भी सही है कि लोगों की लापरवाही और इनके नेटवर्क को न भेद पाने के कारण ही इन लोगों को पकड़ा नहीं जा रहा है। कुछ लोग पकड़े भी जा रहे हैं लेकिन मास्टरमाइंड पुलिस की पहुंच से दूर हैं। बैंक प्रबंधन, प्रशासन, पुलिस जागरूकता के लिए लोगों को समय-समय पर सचेत भी करते हैं लेकिन यह समझ से परे है कि लोग क्यों नहीं समझ पाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इसमें कम पढ़े लिखे लोग नहीं अपितु वे लोग अधिक शिकार हो रहे हैं जो ज्यादा पढ़े लिखे हैं। इस पर मंथन की जरूरत है कि लोग क्यों नहीं समझ पा रहे हैं या लालच उनकी सोचने समझने की शक्ति पर भारी पड़ रहा है। लोगों को यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि आज के इस दौर में कोई किसी को एक पैसा नहीं दे सकता है। ऐसे में बिना लॉटरी डाले लॉटरी कैस लग सकती है। नौकरी पाने की एक व्यवस्था होती है, जिसे पूरा करके ही पद पाया जा सकता है। हैरत है कि पढ़े-लिखे लोग भी अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने में पीछे नहीं हैैं। नौकरी दिलाने के झांसे में आकर अपने खून पसीने की कमाई किसी के हाथ में सौंप देना भी समझदारी नहीं है। ठगी के मामलों की बारंबारता यही बताती है कि लोग ठगे जाने के बावजूद लोगों ने सबक नहीं सीखते हैं। पुलिस के लिए भी चुनौती है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए पुख्ता तंत्र विकसित नहीं हो पाया है। इस सबके बीच जरूरी है कि व्यक्ति सतर्क रहे, सावधान रहे। अपनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि किसी के झांसे में न आएं। सतर्क रहे और सुरक्षित रहें।