EXCLUSIVE हिमाचल में 55 फीसदी बच्चे और 42 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया ग्रस्त

RNN DESK। हिमाचल प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के आधे से ज्यादा बच्चे एनीमिया (anemia in Himachal) यानी शरीर में खून की कमी होने की बीमारी से जूझ रहे हैं। यह तस्वीर केंद्र सरकार की हाल में आई नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की पांचवीं रिपोर्ट में सामने आई है। एनएफएचएस की इस
 

RNN DESK। हिमाचल प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के आधे से ज्यादा बच्चे एनीमिया (anemia in Himachal) यानी शरीर में खून की कमी होने की बीमारी से जूझ रहे हैं। यह तस्वीर केंद्र सरकार की हाल में आई नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की पांचवीं रिपोर्ट में सामने आई है।

एनएफएचएस की इस रिपोर्ट में सामने आया कि हिमाचल में पिछले सर्वे की तुलना में दो फीसदी बढ़ौतरी हुई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक NFHS-2015-16 में 53.7 फीसदी बच्चे में खून की कमी थी, जो अब बढ़कर 55.4 फीसदी हो गई है। हिमाचल के शहरी क्षेत्र में 58.2, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 55.0 बच्चे एनीमिया के शिकार हैं। यही नहीं हिमाचल प्रदेश में 42.2 फीसदी गर्भवती महिलाएं भी खून की कमी की बीमारी से जूझ रही हैं। ऐसे में सरकार की पोषण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं के बावजूद देश के बच्चों में बढ़े एनीमिया के मामले खुद सरकार के उठाए गए क़दमों पर सवाल खड़ा करते हैं।

 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हषवर्धन ने 12 दिसंबर को नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की इस पांचवीं रिपोर्ट का पहला हिस्सा जारी किया। रिपोर्ट के इस हिस्से में देश के 17 राज्यों समेत पांच केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इसमें ज्यादातर राज्यों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में बढ़ते एनीमिया के मामले चिंताजनक स्थिति बयां करते हैं।

 

एनीमिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने साल 2018 में देश में पोषण अभियान के तहत एनीमिया मुक्त भारत अभियान की भी शुरुआत की थी ताकि वर्ष 2022 तक हर साल तीन फीसदी तक एनीमिया के प्रसार को कम किया जा सके। इसके तहत बच्चों को भी आयरन की गोलियां देना, पेट में कीड़े मारने की दवा देना, एनीमिया पीड़ित पुरुषों और महिलाओं को पोषण संबंधी आहार की जानकारी देना जैसे कई कदम शामिल हैं।

 

फिलहाल एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत हर साल तीन फीसदी तक एनीमिया के प्रसार को रोकने का लक्ष्य तय किया है, मगर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की हालिया रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर राज्यों में पांच साल के बच्चों में ही एनीमिया के मामले काफी बढ़े हैं।