हिमाचल में खतरनाक ईंधन से पक रहा खाना, सेहत के साथ हो रहे कई नुकसान

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश की आधी आबादी खाना पकाने के लिए खतरनाक ईंधन (hazardous fuel) का इस्तेमाल कर रही है। खतरनाक ईंधन (hazardous fuel) का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसके साथ ही पर्यावरण और जलवायु को भी नुकसान हो रहा है। यह खतरनाक ईंधन हमारी जीवन को भी प्रभावित कर रहे
 

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश की आधी आबादी खाना पकाने के लिए खतरनाक ईंधन (hazardous fuel) का इस्तेमाल कर रही है। खतरनाक ईंधन (hazardous fuel) का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसके साथ ही पर्यावरण और जलवायु को भी नुकसान हो रहा है। यह खतरनाक ईंधन हमारी जीवन को भी प्रभावित कर रहे हैं। हाल ही में आई नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) की पांचवीं रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। यह रिपोर्ट 12 दिसंबर 2020 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने जारी की है।

 

रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल में मात्र 53.9 फीसदी आबादी ही खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल कर रही है, जबकि 46.1 आबादी खतरनाक ईंधन का इस्तेमाल कर रही है। लकड़ी, चारकोल, कोयले, गोबर के उपलों से खाना पकाकर खाना सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसके कारण घर के भीतर वायु प्रदूषण होता है। जिससे हृदय और फेफड़ों की बीमारी और सांस के संक्रमण फैल रहे है। वायु प्रदूषण से फैली बीमारियों के बाद मृत्‍यु होने का चौथा सबसे बड़ा कारण खतरनाक ईंधनों का इस्तेमाल है।

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स्‍वच्‍छ चूल्‍हे व स्‍वच्‍छ ईंधन का इस्तेमाल करने के मामले में शिमला पहले नंबर पर है। शिमला में 78 फीसदी आबादी खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करते हैं। मगर देश के पिछड़े जिलों में शामिल चंबा जिला प्रदेश में सबसे अंतिम पायदान पर है। चंबा जिले में सबसे कम मात्र 35 फीसदी आबादी को ही स्वच्छ ईंधन उपलब्ध है। यहां की 65 फीसदी आबादी अभी भी लड़की के सहारे खाना पकाने के लिए मजबूर है। स्वच्छ ईंधन में एलपीजी का इस्तेमाल और इलेक्ट्रिक चूल्हे आते हैं।

 

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केंद्र सरकार ने उठाए कदम, मगर सवाल भी कई

हालांकि केंद्र सरकार लोगों को ऐसे चूल्‍हे उपलब्‍ध करा रही हैं, जिनमें तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का इस्‍तेमाल होता है। इनके जलने पर वातावरण अधिक स्‍वच्‍छ रहता है। जमीनी स्‍तर पर इसकी हकीकत भी कुछ और है। सरकार ने गरीबों में उज्ज्वला योजना के तहत गैस तो उपलब्ध करवा दी है। मगर सवाल यह है कि ऐसे गरीब परिवार रोजमर्रा का खाना पकाने के लिए गैस भरवाने का खर्च भी उठा सकते हैं। क्या इसका इस्तेमाल पूरी तरह से सुरक्षित है। अगर गैस सिलेंडर में किसी तरह की खराबी आ जाए तो क्या होगा ?