कोरोना को मात देने वाले हो रहे ब्लैक फंगस का शिकार, हिमाचल में अलर्ट

हिमाचल में कोविड संकट के बीच अब ब्लैक फंगस का भी अलर्ट जारी किया गया है। कोरोना को मात देने के बाद लोग कवक (फंगस) संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। इस संक्रमण को आमतौर पर ब्लैक फंगस नाम से पहचाना जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम ‘म्यूकोरमाइकोसिस’ है। इस संक्रमण की वजह से लोगों
 

हिमाचल में कोविड संकट के बीच अब ब्लैक फंगस का भी अलर्ट जारी किया गया है। कोरोना को मात देने के बाद लोग कवक (फंगस) संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। इस संक्रमण को आमतौर पर ब्लैक फंगस नाम से पहचाना जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम ‘म्यूकोरमाइकोसिस’ है। इस संक्रमण की वजह से लोगों की आंखों की रोशनी जा रही है और कुछ मामलों में मौत तक हो जा रही है। आइए जानते हैं कि आप अपने मरीज को इस जानलेवा कवक संक्रमण से किस तरह बचा सकते हैं।

 

 

हिमाचल में कोविड संकट के बीच अब ब्लैक फंगस का भी अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल में भी उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ब्लैक फंगस के संक्रमण की आशंका बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में कोरोना का इलाज कराकर घर लौटे मरीजों पर ब्लैक फंगस ने हमला बोल दिया है। इन रोगियों की नाक से खून आ रहा है और आंखों पर सूजन आ गई है। साथ ही सांस फूल रही है।

 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विशेष सचिव स्वास्थ्य निपुण जिंदल ने बताया कि हालांकि हिमाचल प्रदेश में अभी तक ब्लैक फंगस का कोई मामला सामने नहीं आया है। फिर भी एहतियातन अलर्ट रहने को कहा है। मुख्य सचिव अनिल खाची ने बताया कि अधिकारियों को इस संबंध में क्लीनिकल जरूरतें पूरा करने के लिए कहा है।

 

 

क्या है म्यूकर माइकोसिस

भारतीय चिकित्सा विज्ञान परिषद (आईसीएमआर) के मुताबिक, म्यूकर माइकोसिस एक तरह का दुर्लभ फंगल इंफेक्शन है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है। यह संक्रमण मस्तिष्क, फेफड़े और त्वचा पर भी असर कर रहा है। इस बीमारी में कई के आंखों की रौशनी चली जाती है वहीं कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है। अगर समय रहते इलाज न मिले तो मरीज की मौत हो सकती है।

 

 

पहले से बीमार लोगों को खतरा

यह फंगल इंफेक्शन उन लोगों पर असर कर रहा है जो कोरोना की चपेट में आने से पहले ही किसी दूसरी बीमारी से ग्रस्त थे और उनका इलाज चल रहा था। इस कारण उनके शरीर की पर्यावरणीय रोगजनकों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे लोग जब अस्पताल में कोरोना के इलाज के लिए भर्ती होते हैं तो वहां के पर्यावरण में मौजूद फंगल उन्हें बहुत तेजी से संक्रमित करती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के इलाज में उपयोग होने वाले स्टेरॉयड भी इस फंगल इंफेक्शन का कारण बन रहे हैं।

 

 

डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा खतरा

आईसीएमआर के अनुसार, कमजोर इम्युनिटी वालों पर यह संक्रमण तेजी से असर करता है। खासतौर से कोरोना के जिन मरीजों को डायबिटीज है, उनमें शुगर लेवल बढ़ जाने पर म्यूकर माइकोसिस खतरनाक रूप ले सकता है।

आंखों में लाली-दर्द हो तो सतर्क रहें

इसके लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, खूनी उल्टी और बदली हुई मानसिक स्थिति के साथ आंखों या नाक के आसपास दर्द और लाली दिखना शामिल हैं। वहीं, स्किन पर ये इंफेक्शन होने से फुंसी या छाले पड़ सकते हैं और इंफेक्शन वाली जगह काली पड़ सकती है। कुछ मरीजों को आंखों में दर्द, धुंधला दिखाई देना, पेट दर्द, उल्टी या मिचली भी महसूस होती है। हालांकि, सलाहकारों के अनुसार, हर बार नाक ब्लॉक होने की वजह ब्लैक फंगस हो ये भी जरूरी नहीं है। इसलिए जांच कराने में संकोच न करें।