आनंद और अंत की दूरी पाट गया किन्नौर हादसा, डॉ. दीपा का ट्वीट हो रहा वायरल

धर्मशाला। आनंद और अंत के बीच की दूरी इतनी छोटी हो सकती है ! खुशी और खामोशी का फासला इतना कम हो सकता है ! हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में हुई बेहद डरावनी दुर्घटना में जान गंवा देने वालीं डॉ. दीपा शर्मा की कहानी से आपके जेहन में भी ऐसी ही बातें कौंधेंगी। डॉ. दीपा
 

धर्मशाला। आनंद और अंत के बीच की दूरी इतनी छोटी हो सकती है ! खुशी और खामोशी का फासला इतना कम हो सकता है ! हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में हुई बेहद डरावनी दुर्घटना में जान गंवा देने वालीं डॉ. दीपा शर्मा की कहानी से आपके जेहन में भी ऐसी ही बातें कौंधेंगी। डॉ. दीपा कोविड-19 महामारी से पसरी मायूसी के माहौल को चीर मस्ती की ताजी हवा लेने हिमाचल दौरे पर निकली थीं, लेकिन यह उनकी जिंदगी का अंतिम सफर था।

 

डॉ. दीपा ने दिल दहला देने वाले हादसे से पहले ही अपनी तस्वीर ट्वीट की थी। तब वो भारत-तिब्बत की सीमा के अंतिम छोर पर थीं। उन्होंने लिखा था, ‘भारत के आखिरी छोर पर खड़ी हूं, जहां तक आम नागरिकों को आने की अनुमति है। यहां से करीब 80 किमी आगे तिब्बत शुरू हो जाता है, जिस पर चीन ने अवैध कब्जा कर रखा है।’ डॉ. दीपा इंडो-तिब्बत बोर्डर पुलिस फोर्स (ITBP) की नागास्ती पोस्ट के पास खड़ी थीं। उनके कंधे में कैमरा और बैग लटक रहा था। चेहरे की मुस्कान मानो वहां की हसीन वादियों से बातें कर रही थी। लेकिन, किसे पता था कि एक भयावह त्रासदी के पीछे यह मुस्कान भी सदा के लिए अलविदा कर जाएगी।

 

डॉ. दीपा ने यह तस्वीर ट्वीट करने से एक दिन पहले एक और तस्वीर शेयर की थी। लग रहा था जैसे वो पहाड़ी पर बांहें फैलाए प्रकृति को अपनी आगोश में समेट रही हों।

उसी दिन सुबह उन्होंने एक वीडियो के जरिए बताया था कि वो प्रकृति की गोद में वक्त बिताकर कितना खुश हैं। लेकिन, कहते हैं ना खुशी और गम तो सिर्फ अहसास है, हकीकत तो इससे कहीं परे है।

डॉ. दीपा जब प्रकृति की गौरवा का गान कर रही थीं, तब उन्हें पता नहीं था कि उसी प्रकृति के अंदर खलबली मच रही है। डॉ. दीपा उस खौफनाक भूस्खलन की शिकार हो गईं जिसने क्षणभर में तबाही ला दिया। पहाड़ी से नीचे गिरते बड़े-बड़े चट्टानों के धुएं में सारी खुशियां धुंधली पड़ गईं और चौतरफा गम का साया…

क्या यही है जिंदगी?

हंसमुख दीपा अकेले प्रकृति की सैर को निकली थीं, लेकिन राजस्थान के जयपुर की इस खुशमिजाज बेटी किन्नौर की सांगला घाटी पहुंचीं तो वह उनकी जिंदगी के सफर की आखिरी मंजिल साबित हुई। 34 साल की डॉ. दीपा शर्मा के जान जाने की खबर ने न केवल उनके शुभचिंतकों बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हर किसी के मन में वही सवाल कौंध रहा है- आनंद और अंत के बीच की दूरी इतनी छोटी हो सकती है ! खुशी और खामोशी का फासला इतना कम हो सकता है!